पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बना वायुसेना का 'वॉर जोन', सुखोई और मिराज ने भरी हुंकार!
आज आसमान से ऐसी गर्जना सुनाई दे रही है जिसे सुनकर सरहद पार बैठे दुश्मनों के कलेजे कांप रहे होंगे! आज उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना का एक अजेय युद्ध मैदान बन चुका है। सुल्तानपुर के 'अखलीकिरी करवत' गांव के पास बिछी 3.2 किलोमीटर की वो कंक्रीट की पट्टी, आज भारत के पराक्रम की गवाह बन रही है। जब आसमान से सुखोई और मिराज जैसे खूंखार शिकारी परिंदे सड़क को छूते हुए निकल रहे हैं, तो यकीन मानिए, नजारा ऐसा है कि रोंगटे खड़े हो जाएं। आज बात सिर्फ एक एयर शो की नहीं है, आज बात है भारत की उस तैयारी की, जो युद्ध के समय बाजी पलट कर रख देगी।
आज दोपहर 2 बजे जैसे ही घड़ी की सुइयों ने इशारा किया, सुल्तानपुर का आसमान फाइटर जेट्स के शोर से गूंज उठा। Sukhoi-30 MKI ने जब अपनी 'टच एंड गो' ड्रिल शुरू की, तो हवा की गति को मात देते हुए उसने हाईवे की पट्टी को छुआ और पलक झपकते ही दोबारा आसमान की ऊंचाइयों में ओझल हो गया। इसके साथ ही मिराज-2000, जगुआर और स्वदेशी शान 'तेजस' ने अपनी युद्धक क्षमताओं का ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद हर शख्स गर्व से भर उठा।
इस युद्धाभ्यास की खासियत यह है कि यहाँ सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के 'वर्कहॉर्स' यानी मालवाहक विमान भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। C-295 और AN-32 जैसे भारी-भरकम विमानों ने इस हाईवे एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग कर यह साबित कर दिया कि आपातकाल में सेना की रसद, टैंक और भारी हथियार भी एक्सप्रेस-वे के जरिए कहीं भी पहुंचाए जा सकते हैं।
इस शो का सबसे रोमांचक हिस्सा रहा Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर का ऑपरेशन। आसमान में स्थिर खड़े इस हेलीकॉप्टर से वायुसेना के जांबाज 'विशेष बल' (Special Forces) के जवान 'स्लिदरिंग' तकनीक के जरिए रस्सियों के सहारे नीचे उतरे। यह ड्रिल दर्शाती है कि अगर कहीं आतंकी हमला हो या युद्ध छिड़े, तो हमारी सेना हाईवे के रास्ते पल भर में दुश्मन के पीछे लैंड कर सकती है।
जिस एयरस्ट्रिप पर यह सब हो रहा है, उसे बनाने में इंजीनियरिंग का करिश्मा दिखाया गया है। इसकी मोटाई 320 एमएम रखी गई है, जो इसे इतना मजबूत बनाती है कि कई टन वजनी फाइटर जेट्स जब पूरी ताकत से इस पर लैंड करते हैं, तो सड़क को खरोंच तक नहीं आती। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 12 किलोमीटर के दायरे को किले में तब्दील कर दिया है और 1 मई तक ट्रैफिक पूरी तरह डायवर्ट है ताकि अभ्यास में कोई खलल न पड़े। यह अभ्यास सिर्फ सूरज की रोशनी तक सीमित नहीं है। शेड्यूल के मुताबिक, शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक भी युद्धाभ्यास जारी रहेगा। इसका मकसद यह जांचना है कि अगर रात के घने अंधेरे में दुश्मन पर हमला करना हो या अंधेरे में लैंडिंग करनी हो, तो हमारे पायलट और इंफ्रास्ट्रक्चर कितने तैयार हैं।
यह पहली बार नहीं है जब सुल्तानपुर की यह धरती इतिहास लिख रही है। 16 नवंबर 2021 को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से इसी पट्टी पर लैंडिंग कर इसका उद्घाटन किया था। वह भारत के इतिहास का एक ऐतिहासिक पल था जब देश के मुखिया ने खुद हाईवे एयरस्ट्रिप की मजबूती पर मुहर लगाई थी। उसके बाद से लगातार होते ये अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि यह रनवे हमेशा 'एक्शन रेडी' रहे। भारतीय वायुसेना ने आज एक बार फिर दहाड़ कर कह दिया है 'नभः स्पृशं दीप्तम्' यानी आकाश को गौरव के साथ छूना!

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