पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित हुआ भारत का इलायची निर्यात

पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने भारतीय इलायची निर्यातकों की योजनाओं पर गंभीर असर डाला है। रमजान के आगामी सीजन में खाड़ी देशों (Gulf Markets) में भारतीय इलायची की बड़ी हिस्सेदारी बनाने की उम्मीदें फिलहाल संकट में पड़ गई हैं। सऊदी अरब, कुवैत और UAE जैसे प्रमुख आयातकों ने कहा है कि वर्तमान अस्थिरता के बीच वे स्टॉक के आदान-प्रदान को रोकना चाहते हैं।

शिपिंग संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान

बोडिनायकनूर के निर्यातक एस.के.एम. धनवंतन के अनुसार, ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव और अमेरिका की संलिप्तता ने वैश्विक सप्लाई चेन (Supply Chain) को बाधित कर दिया है। प्रमुख शिपिंग लाइनों ने इस मार्ग से पारगमन निलंबित कर दिया है। ईरान भारतीय हरी इलायची का एक बड़ा बाजार है और मौजूदा अस्थिरता ने नियमित व्यापार को जोखिम भरे सौदे में बदल दिया है।

ग्वाटेमाला की फसल विफलता का मौका खो गया

साल 2026 का सीजन भारतीय इलायची निर्यातकों के लिए अत्यधिक सकारात्मक माना जा रहा था। भारत के मुख्य प्रतिस्पर्धी, ग्वाटेमाला में फसल लगभग 50 प्रतिशत तक बर्बाद हो गई थी, जिससे वैश्विक बाजार में एक बड़ा अवसर बन गया था। निर्यातकों को उम्मीद थी कि वे इस अवसर का फायदा उठाकर 14,000 टन तक का रिकॉर्ड निर्यात कर सकेंगे, लेकिन युद्ध की स्थिति ने इस “Golden Season” की प्रगति को रोक दिया है।

नीलामी बाजार में कीमतों पर असर

इडुक्की के वंदनमेडु नीलामी केंद्र के अनुसार, निर्यात में रुकावट के कारण नीलामी बाजार को रोजाना लगभग 1.8 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इलायची की कीमतें 2,450 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,300 रुपये पर आ गई हैं। प्रतिदिन लगभग 120 टन इलायची की नीलामी प्रभावित हो रही है।

घरेलू बाजार में स्थिरता

हालांकि निर्यात बाधित हुआ है, घरेलू बाजार मजबूत मांग (Domestic Demand) के कारण फिलहाल स्थिर बना हुआ है। आगामी त्योहारों और रमजान के सीजन के चलते घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, पिछले साल का कोई “Carryover Stock” उपलब्ध नहीं है, जिससे बाजार में आपूर्ति पर बड़ा दबाव नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खाड़ी देशों में संकट लंबा चलता है, तो यह भारतीय इलायची की कीमतों और निर्यात पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

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