भारत बना रहा है 1000 किलो का स्वदेशी महाबम, दुश्मन के बंकरों का होगा अंत!
भारत ने दुनिया को साफ संदेश दे दिया है कि अब हम जंग के मैदान में किसी और के भरोसे नहीं रहेंगे। वेस्ट एशिया के भीषण युद्ध और 'ऑपरेशन सिंदूर' की आग ने भारत को एक बड़ी सीख दी है कि वक्त आने पर अपने ही हथियार काम आते हैं। इसी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए एक ऐसे 'गेम चेंजर' हथियार को हरी झंडी दे दी है, जो पलक झपकते ही दुश्मन के बंकरों, पुलों और रनवे को मलबे के ढेर में तब्दील कर देगा। हम बात कर रहे हैं 1000 किलो के उस स्वदेशी हवाई बम की, जिसकी धमक से सीमा पार दुश्मनों की नींद उड़ने वाली है। आइए जानते हैं भारत के इस 'मेगा प्रोजेक्ट' की पूरी इनसाइड स्टोरी!
अभी तक भारतीय वायु सेना भारी तबाही मचाने के लिए अमेरिका के मशहूर MK-84 बमों पर निर्भर रहती थी। यह बम लगभग 907 किलो विस्फोटक ले जाने में सक्षम होता है। लेकिन अब भारत अपनी धरती पर इससे भी घातक 1000 किलो के हवाई बम तैयार करने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए ईओआई (EOI) जारी कर दिया है, जिसके तहत 600 महाबमों का निर्माण किया जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट 'बाय इंडियन' कैटेगरी में होगा, यानी डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सब कुछ शुद्ध रूप से देसी होगा! ये नए स्वदेशी बम कोई साधारण विस्फोटक नहीं हैं। इनकी मारक क्षमता बेमिसाल है:
हाई कैलिबर वेपन: ये बम गिरते ही खुद-ब-खुद टुकड़ों में बंटकर बड़े इलाके में फैल जाते हैं, जिससे तबाही का दायरा कई गुना बढ़ जाता है।
यूनिवर्सल फिट: सबसे बड़ी बात यह है कि इन्हें रूसी (Sukhoi) और पश्चिमी (Rafale/Mirage) दोनों तरह के फाइटर जेट्स पर लगाया जा सकेगा।
टारगेट: ये बम दुश्मन के मजबूत कंक्रीट बंकरों, बड़े पुलों, रेलवे यार्डों और हथियारों के गोदामों को एक ही झटके में नेस्तनाबूद कर देंगे।
इस प्रोजेक्ट को बहुत ही बारीकी से डिजाइन किया गया है:
पहला चरण (प्रोटोटाइप): इसमें 6 प्रोटोटाइप बम बनाए जाएंगे। इनमें 'लाइव' (विस्फोटक वाले) और 'इनर्ट' (बिना विस्फोटक वाले) दोनों तरह के बम शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसमें 50% स्वदेशी सामग्री का होना अनिवार्य है।
दूसरा चरण (उत्पादन): ट्रायल्स सफल होने के बाद कंपनियों को आरएफपी (RFP) जारी किया जाएगा और कुल 600 बमों की डिलीवरी ली जाएगी।
ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने और उत्पादन शुरू होने तक करीब ढाई साल का वक्त लगेगा। भारतीय निजी कंपनियों को भी इसमें हिस्सा लेने की छूट है, बशर्ते वे तकनीकी और वित्तीय पैमानों पर खरी उतरें। विदेशी सहयोग की अनुमति तो है, लेकिन दिल और दिमाग भारतीय ही होना चाहिए!
भारत का यह फैसला न केवल वायु सेना को मजबूत करेगा, बल्कि दुनिया को यह भी बताएगा कि भारत अब रक्षा निर्यातकों की कतार में खड़ा होने के लिए तैयार है। जब आसमान से भारत के ये 1000 किलो के 'स्वदेशी काल' गिरेंगे, तो दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा। यह आत्मनिर्भर भारत की एक ऐसी गर्जना है, जो सरहद पार लंबे समय तक सुनाई देगी।


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