अंगद की तरह जमे 99 पुलिसकर्मियों पर चली तबादले की तलवार

इंदौर : इंदौर ग्रामीण पुलिस में वर्षों से एक ही थाने और शाखाओं में जमे पुलिसकर्मियों पर आखिरकार प्रशासनिक चाबुक चल गया है। विभाग ने एक साथ 99 पुलिस कर्मचारियों के तबादले कर उन्हें अलग-अलग थानों और इकाइयों में भेज दिया है। इस बड़े फेरबदल ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है, वहीं अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि तबादला आदेशों का पालन होता है या फिर पर्दे के पीछे ‘सेटिंग’ और ‘जुगाड़’ का खेल शुरू होगा।

तबादला सूची में बेटमा, खुड़ैल, किशनगंज, मानपुर, चंद्रावतीगंज, महू, सांवेर, क्षिप्रा, सिमरोल, बड़गोदा, देपालपुर और गौतमपुरा जैसे प्रमुख थाने शामिल हैं। इनमें कई ऐसे कर्मचारी हैं जो वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ थे और स्थानीय स्तर पर इतनी मजबूत पकड़ बना चुके थे कि उन्हें थाने का ‘स्थायी चेहरा’ माना जाने लगा था।

वर्षों से उठ रही थी मांग, अब चला प्रशासनिक बुलडोजर

ग्रामीण पुलिस में लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मचारियों को हटाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। पुलिस व्यवस्था में यह माना जाता है कि किसी कर्मचारी का लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बने रहना स्थानीय प्रभाव और संपर्कों को बढ़ावा देता है, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी पृष्ठभूमि में विभाग ने 99 कर्मचारियों का सामूहिक तबादला कर साफ संदेश दिया है कि अब ‘कंफर्ट जोन’ में स्थायी पोस्टिंग का दौर खत्म होना चाहिए।

बेटमा थाना बना चर्चा का केंद्र

पूरी तबादला सूची में सबसे ज्यादा चर्चा बेटमा थाने की हो रही है। यहां से वर्षों से पदस्थ कई पुलिसकर्मियों को अन्य थानों में भेजा गया है।

सूची के अनुसार उपनिरीक्षक संदीप पोरवाल को मानपुर, कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक कैलाश परमार, मोहन परमार और मोहन सिंह को किशनगंज, कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक दिनेश परमार को देपालपुर तथा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक राजेश पटेल को किशनगंज भेजा गया है।

इसके अलावा आरक्षक तुलसीराम, उमेश परमार और नरेंद्र शर्मा को खुड़ैल थाने में पदस्थ किया गया है। इस तरह बेटमा से कुल 9 पुलिसकर्मियों की विदाई हुई है।

वहीं बेटमा थाने में कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक मुनेशसिंह यादव, कृष्ण जादौन, प्रधान आरक्षक शरद कुमार कोगरे, आरक्षक गगनजीत सिंह, मुकेश मंडलोई और शोभाराम की नई पदस्थापना की गई है। नए स्टाफ की आमद के साथ थाना अब नई कार्यशैली, नई जिम्मेदारियों और नई प्राथमिकताओं के दौर में प्रवेश करेगा।

अब असली सवाल—रिलीव होंगे या रुकवाएंगे आदेश?

तबादला सूची जारी होने के बाद पुलिस महकमे और आमजन के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी कर्मचारी नए पदस्थापना स्थल पर जाकर कार्यभार ग्रहण करेंगे, या फिर प्रभाव, संपर्क और सिफारिशों के दम पर आदेशों में बदलाव कराने की कोशिशें शुरू होंगी?

पुलिस विभाग के गलियारों में चर्चा है कि हर तबादला सूची के बाद कुछ कर्मचारी अपने पुराने ठिकानों पर बने रहने या फिर कुछ समय बाद वापसी का रास्ता निकालने में जुट जाते हैं। ऐसे में इस बार की सूची की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने कर्मचारी वास्तव में नई जगह जाकर जिम्मेदारी संभालते हैं।

कागजों से निकलकर जमीन पर दिखना चाहिए असर

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि समय-समय पर होने वाले स्थानांतरण से कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है, जवाबदेही बढ़ती है और पुलिसिंग अधिक प्रभावी बनती है। लेकिन यदि तबादला आदेशों का कड़ाई से पालन नहीं हुआ और कर्मचारी फिर पुराने ठिकानों पर लौट आए, तो पूरी कवायद महज कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी।

फिलहाल 99 पुलिसकर्मियों के तबादले ने इंदौर ग्रामीण पुलिस में हलचल जरूर पैदा कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा निगाहें बेटमा थाने पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक सर्जरी से व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आता है या फिर वर्षों से जमे चेहरे एक बार फिर वापसी का रास्ता खोज लेते हैं।

रिपोर्टर : राहुल देवड़ा

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