मंदिर के पास गंदगी का प्लांट क्यों? ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अधिकारियों पर उठे सवाल
बेटमा : नगर की आस्था, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े मां अमन चमन मंदिर के समीप प्रस्तावित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माण को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त जनाक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों, श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और करणी सेना ने एक स्वर में इस योजना का विरोध करते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई है।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि क्षेत्रवासियों ने विकास कार्यों के लिए अपनी जमीनें देकर सहयोग किया, लेकिन अब उसी भूमि के आसपास मंदिर के समीप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होंगी, बल्कि क्षेत्र की पहचान और पवित्रता भी प्रभावित होगी।
ग्रामीणों ने कहा कि मां अमन चमन मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और बेटमा की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे स्थान के पास गंदे पानी और मल-मूत्र के उपचार से जुड़ा प्लांट स्थापित करना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बेटमा का ऐतिहासिक दशहरा मैदान, जो अपनी पारंपरिक घुड़दौड़, मटकी फोड़ और निशानेबाजी प्रतियोगिताओं के कारण प्रदेशभर में विशेष पहचान रखता है, उसे भी धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दशकों पुरानी परंपराओं के साक्षी इस मैदान में पहले ही कई कमर्शियल प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं और अब जहां वर्षों से पारंपरिक आयोजन होते आए हैं, वहां भी नए व्यावसायिक प्लॉट देने की तैयारी चल रही है।
करणी सेना तहसील अध्यक्ष महेश हाड़ा ने कहा कि यह केवल जमीन या निर्माण का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और पहचान को बचाने का संघर्ष है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। वहीं पिंटू दरबार सहित अनेक ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया और प्रस्तावित योजना पर पुनर्विचार नहीं किया तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एसटीपी प्लांट के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए तथा मां अमन चमन मंदिर और ऐतिहासिक दशहरा मैदान की गरिमा एवं अस्तित्व को सुरक्षित रखा जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आस्था और परंपरा की कीमत पर किसी भी विकास कार्य को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रिपोर्टर : राहुल
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