भाजपाइयों का मौन, कांग्रेसियों की चुप्पी; मंदिर के पास एसटीपी प्लांट पर जनता में उबाल
इंदौर - मां अमन चमन मंदिर के समीप प्रस्तावित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माण को लेकर क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना का नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और वर्षों पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आने पर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मां अमन चमन मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे धार्मिक स्थल के समीप एसटीपी प्लांट स्थापित करने की योजना से स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विकास के नाम पर लिए जा रहे निर्णयों में स्थानीय जनभावनाओं और सांस्कृतिक महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विरोध कर रहे लोगों ने इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सत्ता में बैठी भाजपा के नेता इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखने से बच रहे हैं, जबकि विपक्ष की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस भी अब तक कोई प्रभावी आवाज नहीं उठा पाई है। लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र की आस्था और पहचान से जुड़ा इतना बड़ा विषय सामने है, तब सत्ता और विपक्ष दोनों का मौन कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने बेटमा के ऐतिहासिक दशहरा मैदान को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि घुड़दौड़, निशानेबाजी और मटकी फोड़ जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं के लिए प्रसिद्ध यह मैदान बेटमा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लगातार व्यावसायिक गतिविधियों और प्लॉट आवंटन के कारण इस ऐतिहासिक मैदान का स्वरूप प्रभावित हो रहा है, जिससे भविष्य में वर्षों पुरानी परंपराओं पर संकट खड़ा हो सकता है।
करणी सेना तहसील अध्यक्ष महेश हाड़ा, पिंटू दरबार एवं अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एसटीपी प्लांट के लिए किसी वैकल्पिक स्थान का चयन किया जाए तथा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों को संरक्षित रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही तो आने वाले दिनों में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास और विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चा और विरोध दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।
रिपोर्टर - राहुल देवड़ा
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