इंदौर जल त्रासदी: 'स्वच्छता के प्रतीक' शहर में दूषित पानी ने ली 11 जानें, उमा भारती ने सरकार को घेरा
इंदौर जल त्रासदी: 'स्वच्छता के प्रतीक' शहर में दूषित पानी ने ली 11 जानें, उमा भारती ने सरकार को घेरा
इंदौर | 2 जनवरी, 2026 देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय भीषण मानवीय त्रासदी और राजनीतिक घमासान का केंद्र बना हुआ है। दूषित पेयजल के कारण अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक सार्वजनिक शौचालय के पास पाइपलाइन में रिसाव के कारण पेयजल में सीवेज का पानी मिल गया, जिसे पीने से यह घातक संक्रमण फैला।
भाजपा के भीतर ही उठे विरोध के स्वर-
इस घटना ने न केवल प्रशासन की पोल खोल दी है, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर भी दरार पैदा कर दी है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए इसे "सिस्टम पर कलंक" बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “इस पाप के लिए गहन पश्चाताप की आवश्यकता है। मानव जीवन की कीमत केवल 2 लाख रुपये का मुआवजा नहीं हो सकती।” उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए इसे परीक्षा की घड़ी बताते हुए शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों को अधिकतम दंड देने की मांग की है।
विपक्ष का तीखा हमला-
विपक्ष ने भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाते हुए कहा कि इंदौर के लोगों को पानी नहीं, जहर दिया गया है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि बार-बार बदबूदार पानी की शिकायत करने के बावजूद प्रशासन "कुंभकर्ण की नींद" क्यों सोया रहा?
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति-
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है और कुछ निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। 2025 के अंत में शुरू हुई यह त्रासदी 2026 की शुरुआत तक एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संकट में बदल गई है, जिसने 'स्मार्ट सिटी' और 'स्वच्छ शहर' के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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