30 की उम्र के बाद पुरुषों में घट रही स्पर्म क्वालिटी? ये हैं प्रमुख कारण

अक्सर बांझपन (Infertility) को महिलाओं की समस्या माना जाता है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह से गलत है. हाल ही में पुरुषों में भी बांझपन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, 20% मामलों में पुरुष ही पूरी तरह जिम्मेदार होते हैं, जबकि 30-40% मामलों में पुरुषों का भी योगदान होता है. इसी कारण अब 30-40 साल के पुरुष भी अपने स्पर्म हेल्थ को लेकर सतर्क हो गए हैं और बड़ी संख्या में सीमन एनालिसिस करवा रहे हैं. हाल के कुछ अध्ययन और शोधों में यह देखा गया है कि पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी (वीर्य गुणवत्ता) में गिरावट आ रही है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
पर्यावरणीय कारक: प्रदूषण, रासायनिक पदार्थ (जैसे की प्लास्टिक में पाए जाने वाले बिस्फेनेल A),और हार्मोनल अवरोधक (जिनका प्रभाव शरीर में टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन पर पड़ता है) स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
आहार और जीवनशैली: अत्यधिक तला-भुना खाना, जंक फूड, शराब, और तंबाकू का सेवन, साथ ही तनाव और अनियमित नींद की आदतें भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
स्वास्थ्य समस्याएं: मोटापा, डायबिटीज़, और हृदय रोग जैसी बीमारियाँ भी शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
उम्र: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में प्राकृतिक रूप से गिरावट आती है। विशेष रूप से 40 वर्ष की उम्र के बाद यह गिरावट ज्यादा होती है।
गर्मी का प्रभाव: अंडकोष का अधिक तापमान (जैसे लैपटॉप को घुटनों पर रखना, ज्यादा गर्म पानी से स्नान करना) भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता को कम कर सकता है।
जैविक और आनुवंशिक कारण: कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी होते हैं जो स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए, पुरुषों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सही आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है।
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