पश्चिम एशिया तनाव पर संसद में जयशंकर का बयान: बातचीत और कूटनीति पर जोर, भारतीयों को वापस लाने पर क्या कहा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वहां फंसे भारतीयों को लेकर राज्यसभा में काफी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सदन में स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को लेकर पूरी तरह सतर्क और गंभीर है। भारत ने 20 फरवरी को ही आधिकारिक बयान जारी कर अपनी चिंता जाहिर की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी।

Jaishankar Holds First Telephone Call with the Taliban, Discusses Pakistan

विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार के अलग-अलग मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि समय पर सही फैसले लिए जा सकें। उन्होंने कहा कि यह संकट भारत के लिए कई वजहों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। इसके अलावा Iran में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है, क्योंकि तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। ऐसे में सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा गंभीर चिंता का विषय है।

जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति लगातार खराब हो रही है और इसका असर वहां के सामान्य जीवन और कामकाज पर पड़ रहा है। इस संकट के दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है।S Jaishankar as the voice of India's Hindu nationalist foreign policy | The  Caravan

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि Embassy of India, Tehran पूरी तरह अलर्ट पर है। दूतावास वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रहा है। साथ ही ईरान में मौजूद भारतीय व्यापारियों को Armenia के रास्ते भारत लौटने में भी सहायता दी गई है। अब तक करीब 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं और सरकार बाकी लोगों को भी वापस लाने के प्रयास कर रही है।India is Far Ahead of US in Cashless Transactions: Jaishankar

विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि मौजूदा हालात के कारण फिलहाल ईरान के शीर्ष नेताओं से सीधा संपर्क करना आसान नहीं है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार व्यक्त किया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत लवन को Cochin Port पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया है।

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