ईरान-इजरायल संघर्ष: फीरोजाबाद और खुर्जा की MSME चिंता में
पश्चिम एशिया के रेगिस्तान में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा बारूदी संघर्ष अब केवल दो देशों की जंग नहीं रह गयी है। इसकी आग की लपटें सात समंदर पार उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गलियारों तक पहुँच चुकी हैं। एक तरफ ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के केमिकल हब को राख कर रही हैं, तो दूसरी तरफ यूपी के फिरोजाबाद की चूड़ियां और खुर्जा की क्रॉकरी दम तोड़ रही हैं। अगर यह संघर्ष और खिंचा, तो यकीन मानिए, आपकी रसोई का बजट बिगड़ने वाला है और मध्यम वर्ग की जेब पर महंगाई का बम फटने को तैयार है!
जी हां उत्तर प्रदेश का औद्योगिक दिल कहे जाने वाले MSME सेक्टर पर इस युद्ध ने सीधा प्रहार किया है। इंडियन इंडस्ट्रीज असोसिएशन की मानें तो हालात बेहद गंभीर हैं। प्लास्टिक, बिजली उपकरण और पैकेजिंग मटेरियल के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल 50 से 100 फीसदी तक महंगा हो गया है। पेट्रोलियम उत्पादों से बनने वाले पॉलीमर, फिनॉल और प्लास्टिक दाने की कीमतें आसमान छू रही हैं। बड़े घरानों के पास तो 2 महीने का स्टॉक है, लेकिन हमारे छोटे उद्यमियों के पास महज 5-6 दिन का कच्चा माल बचा है। कीमतें बढ़ने से वे अपना माल बाजार में बेच नहीं पा रहे हैं, जिससे नौकरियों पर तलवार लटक गई है। आपको बता दें यूपी से हर साल करीब 1.36 लाख करोड़ का निर्यात होता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है। चिकनकारी, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर और सेफ्टी शूज के कंटेनर बंदरगाहों पर अटके हैं। वहीं ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन युद्ध ने इस व्यापार की कमर तोड़ दी है। एक महीने में ही 1000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। युद्ध ने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बाद कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं।
नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें 25% से 50% तक बढ़ गई हैं।
श्रीलंका में तो स्कूल-दफ्तर तक बंद करने की नौबत आ गई है।
होर्मुज़ दुनिया का सबसे बड़ा तेल मार्ग है!
अगर यहाँ सप्लाई रुकी, तो पूरी दुनिया में अंधेरा छा सकता है।
आपको बता दें ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा असर तेल और गैस पर पड़ा है। कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए। दुनिया भर में ऊर्जा संकट का असर दिख रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतें करीब 50% तक बढ़ गईं
नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है
पाकिस्तान में केरोसिन और अन्य ईंधनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है
श्रीलंका में ईंधन के दाम 25% तक बढ़ चुके हैं
बांग्लादेश ने भारत से डीजल आयात बढ़ा दिया है
वहीं इस संकट के बीच इजरायल के औद्योगिक क्षेत्र में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों से तबाही मचाई है। वहां के केमिकल हब से निकलता काला धुआं इस बात का गवाह है कि जंग अब रिहायशी इलाकों और आर्थिक केंद्रों तक पहुँच चुकी है। अब जंग सिर्फ सरहद पर नहीं, बल्कि नेताओं के घरों तक पहुँचेगी। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के कमांडरों के निजी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। वहीं दूसरी तरफ इजरायली पीएम ने लेबनान में सैन्य ऑपरेशन बढ़ाने के आदेश दिए हैं। उनका साफ़ कहना है कि जब तक हिजबुल्ला का खतरा टलेगा नहीं, हम रुकेंगे नहीं।
वहीं इस सुलगते माहौल के बीच पाकिस्तान एक बड़ी कूटनीतिक चाल चल रहा है। इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों का महाजुटान हो रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच 'संदेशवाहक' का काम कर रहा है। वहीं इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व को समझदार बताया है और संकेत दिया है कि समझौता हो सकता है। लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान के तेल केंद्र पर कब्जे की धमकी देकर सस्पेंस बरकरार रखा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो जंग को 31 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शांति की राह अब भी बारूदी धुएं में गुम है। एक तरफ सीजफायर के लिए कड़ी शर्तें हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल का विस्तारवाद है। भारत सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर अपने नागरिकों को बचाने की कोशिश तो की है, लेकिन अगर सप्लाई चेन लंबे समय तक टूटी रही, तो असर गहरा होगा।
उत्तर प्रदेश के उद्यमी आज दुआ कर रहे हैं कि मिसाइलों का शोर थमे और कूटनीति की जीत हो, वरना सुलगता हुआ पश्चिम एशिया भारत के मध्यम वर्ग की खुशियों को झुलसाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
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