ईरान युद्ध का वैश्विक असर: कहीं ऑड-ईवन लागू, कहीं स्कूल-कॉलेज बंद; भारत ने क्या कदम उठाए
अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और इसके जवाब में तेहरान की ओर से हुए पलटवार का असर अब पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया पहले ही इस टकराव से बुरी तरह प्रभावित हो चुका था, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे कई देशों के महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन भी प्रभावित हुए।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा जरूरतों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से शुरू किया गया यह संघर्ष अब अनजाने में वैश्विक ऊर्जा संकट का कारण बनता दिखाई दे रहा है।
28 फरवरी को शुरू हुआ यह युद्ध अब अपने दसवें दिन में पहुंच चुका है। हालांकि इतने कम समय में ही इसके असर से दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। तेल और गैस की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रबंधन के लिए नए कदम उठाने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और आने वाले समय में महंगाई भी बढ़ सकती है।
ऊर्जा संकट कितना गंभीर है?
1. तेल और गैस भंडारों पर हमले से उत्पादन प्रभावित
युद्ध और आपूर्ति में आई रुकावट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार देखा गया है। केवल एक सप्ताह के भीतर तेल की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसी बीच एक ईरानी ड्रोन हमले के कारण कतर की प्रमुख एलएनजी निर्यात सुविधा को बंद करना पड़ा, जिससे वैश्विक गैस आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। इसके अलावा सऊदी अरब की अरामको, कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और बहरीन की बैपको एनर्जीज की रिफाइनरियों पर हुए हमलों के बाद कई देशों के साथ किए गए तेल-गैस आपूर्ति अनुबंधों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और फोर्स मैज्योर का नोटिस जारी किया गया है। इसके चलते ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत सीमित हो गए हैं, जबकि मांग लगातार बनी हुई है। यही वजह है कि तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से सप्लाई पर बड़ा असर
ईरान की ओर से जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में 200 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
इस मार्ग के बंद होने से जिन देशों ने तेल और गैस की आपूर्ति जारी रखी है, उनके टैंकर भी रास्ते में ही अटक गए हैं। इसका असर खास तौर पर यूरोप और एशिया के देशों पर पड़ रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादकों को करीब 14 करोड़ बैरल तेल की शिपमेंट रोकनी पड़ी है।

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