ईरान का अल्टीमेटम: बंदरगाहों को नुकसान हुआ तो पूरी पर्शियन गल्फ में बढ़ेगा खतरा

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं और इसी बीच ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका की संभावित समुद्री नाकाबंदी योजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उसके बंदरगाहों या समुद्री सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो इसका असर पूरी फारस की खाड़ी पर पड़ेगा और कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं बचेगा।

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ईरान के सरकारी प्रसारण नेटवर्क इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के अनुसार, देश के सैन्य मुख्यालय खातम अल-अनबिया ने बयान जारी कर कहा कि खाड़ी और ओमान सागर में समुद्री सुरक्षा सभी क्षेत्रीय देशों की साझा जिम्मेदारी है। किसी एक देश को निशाना बनाने से पूरे इलाके की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

बयान में यह भी जोर दिया गया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं अपनी समुद्री सीमाओं और संप्रभु अधिकारों की रक्षा को अपना वैधानिक दायित्व मानती हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया कि उसके क्षेत्रीय जल पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और वह किसी भी स्थिति में इससे समझौता नहीं करेगा।ईरान ने चेतावनी को और सख्त करते हुए कहा कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब ऐसा होगा जिससे खाड़ी और ओमान सागर में मौजूद सभी बंदरगाह जोखिम में आ सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका बढ़ सकती है।

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अमेरिका की योजना को ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए इसे “समुद्री डकैती” जैसा कदम करार दिया है। उसका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जल में जहाजों की आवाजाही में बाधा डालना पूरी तरह अवैध है।वहीं दूसरी तरफ, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने घोषणा की है कि 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों की सख्त निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका भी जा सकता है। यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर लिया गया बताया जा रहा है।

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