कम पानी, ज्यादा पैदावार: किसानों की नई सिंचाई रणनीति

देश में खेती के लिए पानी जुटाने के तरीके अब एक जैसे नहीं रहे। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक किसान अपनी जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नए सिंचाई तकनीकियों को अपनाकर न सिर्फ अपनी फसल की पैदावार बढ़ा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण रोजगार को भी नई दिशा दे रहे हैं।

हरियाणा-पंजाब में गहरे बोरवेल की बढ़ती मांग

उत्तर-पश्चिमी राज्यों, विशेषकर हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में किसान गहरे बोरवेल और हाई-प्रेशर सबमर्सिबल पंपों की ओर बढ़ रहे हैं। ओसवॉल पम्प्स के आंकड़े बताते हैं कि अकेले हरियाणा में 30,000 से अधिक गहरे बोरवेल और हाई-प्रेशर सबमर्सिबल पंप लगाए जा चुके हैं। इससे किसान जल स्रोतों को प्रभावी तरीके से उपयोग कर अपनी सिंचाई क्षमता बढ़ा रहे हैं।

महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में सोलर पंप की धूम

सूर्य की धूप भरपूर वाले राज्यों जैसे महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में किसानों ने सोलर पंपों को अपनाना तेज़ कर दिया है। डीजल की बढ़ती कीमतों और PM-कुसुम योजना के प्रभाव से अब किसान सोलर पंप को प्राथमिकता दे रहे हैं। महाराष्ट्र में अब तक 60,000 से अधिक सोलर पंप इंस्टॉल किए जा चुके हैं। ये सोलर पंप न केवल बिजली बचाते हैं, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भी हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ओसवॉल पम्प्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं संस्थापक विवेक गुप्ता का कहना है:
"भारत में सिंचाई अब केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं है। यह पानी के जिम्मेदार, कुशल और दीर्घकालिक उपयोग की दिशा में बड़े परिवर्तन की कहानी बन गई है। किसान अब पंप की कीमत के बजाय उसकी ऊर्जा दक्षता, मजबूती और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन प्रणालियों के साथ अनुकूलता को प्राथमिकता दे रहे हैं।"

सिंचाई और ग्रामीण रोजगार

सिंचाई में यह बदलाव केवल फसल तक सीमित नहीं है। ओसवॉल पम्प्स देशभर में 150 से अधिक इंस्टॉलेशन वेंडर्स के साथ काम कर रहा है, जिनसे जुड़े हर वेंडर में 20-30 प्रशिक्षित तकनीशियन काम कर रहे हैं। कुछ जिलों में महिला-नेतृत्व वाली सर्विस टीमें भी उभर रही हैं, जो ग्रामीण महिला सशक्तिकरण के नए उदाहरण बन रही हैं।

पानी बचाना ही अब असली लक्ष्य

अब किसान केवल पानी खींचने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि कम पानी में अधिक पैदावार लाने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों को अपनाकर टिकाऊ कृषि की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस परिवर्तन ने भारतीय कृषि को नई दिशा और स्थायित्व की ओर अग्रसर किया है।

सिंचाई के आधुनिक तरीकों ने न केवल फसल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है। गहरे बोरवेल से सोलर पंप और माइक्रो-इरिगेशन तक की यह क्रांति भारतीय कृषि के लिए स्थायी और समृद्ध भविष्य की राह खोल रही है।

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