आकाश आनंद से छिनी जिम्मेदारी, अब ईशान आनंद को मिला बड़ा संगठनात्मक रोल
यूपी की सियासत में 2027 का चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है...वैसे-वैसे बहुजन समाज पार्टी के अंदर भी तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है...एक तरफ मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद से पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियां छीन लीं...तो दूसरी तरफ अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर सियासी चर्चा को और हवा दे दी है...
मतलब साफ है...बसपा के भीतर अब अगली पीढ़ी की राजनीति को लेकर बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। जिस भूमिका में कभी आकाश आनंद नजर आते थे...अब उसी जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा ईशान आनंद को सौंप दिया गया है। जी हां मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद यानी ईशू को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे में अब सवाल यही है कि क्या मायावती ने आकाश आनंद के बाद ईशान आनंद को आगे बढ़ाने का मन बना लिया है?
क्या युवा दलित वोटरों को साधने के लिए मायावती अब एक नया चेहरा तैयार कर रही हैं? और सबसे बड़ा सवाल...जिस आकाश आनंद को कभी मायावती ने बसपा के भविष्य के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था...उन्हीं के छोटे भाई ईशान आनंद को अब बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई? तो चलिए...शुरुआत से समझते हैं मायावती के नए सियासी दांव और ईशान आनंद की पूरी कहानी।
जाहिर है कल तक जिन्हें मायावती का उत्तराधिकारी माना जा रहा था, उन आकाश आनंद से एक-एक करके सारे पद छीन लिए गए हैं। इस सियासी पटखनी के बाद आकाश आनंद के सोशल मीडिया तेवर भी बदल गए हैं। उन्होंने अपने 'एक्स' बायो से 'नेशनल कन्वीनर' और 'बसपा कार्यकर्ता' हटाकर अब खुद को महज 'बसपा समर्थक' लिख दिया है। वहीं दूसरी ओर, मायावती के आंख के तारे बने 27 वर्षीय ईशान आनंद को पार्टी का नया मुख्य सेक्टर प्रभारी बना दिया गया है। दरअसल, ईशान आनंद, मायावती के भाई और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं। दिल्ली-एनसीआर में जन्मे ईशान ने अपनी स्कूली पढ़ाई नोएडा और दिल्ली से पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन चले गए और लंदन की मशहूर 'यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर' से कानून की डिग्री हासिल की। वहीं भारत लौटने के बाद ईशान अपने पिता के रियल एस्टेट और पारिवारिक कारोबार को संभाल रहे थे। मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर उन्हें पहली बार सार्वजनिक रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलवाया था। आपको बता दें ईशान ने 24 अप्रैल 2025 को हरियाणा में एक पंजाबी खत्री परिवार की बेटी से लव मैरिज की है। वहीं अब मायावती ने ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर लगभग 15 राज्यों में बसपा के कामकाज और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा का जिम्मा सौंपा है। ईशान इन सभी राज्यों की रिपोर्ट सीधे अपने पिता आनंद कुमार को सौंपेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि यह जिम्मेदारी पहले आकाश आनंद संभाला करते थे।
जाहिर है एक समय था जब आकाश आनंद को मायावती ने पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था। उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं...चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया...और कई मौकों पर वह पार्टी के लिए आक्रामक तरीके से मैदान में उतरते नजर आए। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। मायावती ने आकाश आनंद से बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारियां छीन ली हैं। और इसी बीच छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में नई जिम्मेदारी मिल गई है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या बसपा अब आकाश आनंद के विकल्प के तौर पर ईशान आनंद को तैयार कर रही है? हालांकि, मायावती ने ईशान को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। वहीं माना जा रहा है कि युवाओं और पढ़े-लिखे दलित कैडर को साधने के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद जैसे आक्रामक युवा दलित नेताओं के असर को काटने के लिए मायावती ने ईशान आनंद को एक साफ़-सुथरे, पढ़े-लिखे और नए चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया है। हालाँकि, कहा ये भी जा रहा है कि मायावती का यह दांव दांव उल्टा भी पड़ सकता है। क्योंकि आकाश आनंद लगातार मैदान में सक्रिय थे और अपने आक्रामक तेवरों से युवा दलितों के बीच अपनी पहचान बना चुके थे। वहीं, ईशान आनंद के पास सियासत का कोई अनुभव नहीं है और उन्हें फिलहाल यूपी-उत्तराखंड जैसे मुख्य सियासी अखाड़े से दूर रखा गया है।
जाहिर है बसपा के अंदर मची यह अंदरूनी खींचतान ऐसे वक्त पर हुई है जब पार्टी अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। एक तरफ जहां आकाश आनंद को दोबारा पार्टी से बाहर किए जाने की खबरें गर्म हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुभवहीन ईशान आनंद के कंधों पर 15 राज्यों में पार्टी का परचम लहराने की भारी जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि लंदन से वकालत पढ़कर लौटे ईशान आनंद बिना किसी राजनीतिक अनुभव के, बसपा के खिसकते जनाधार को वापस ला पाते हैं या नहीं? क्या बहनजी का यह नया सियासी दांव 2027 के चुनाव में मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या फिर बसपा के कैडर में और ज्यादा भ्रम फैलाएगा? इस सियासी ड्रामे की अगली किश्त का इंतजार पूरे उत्तर प्रदेश को है!
No Previous Comments found.