इजरायल-ईरान युद्ध की आग में झुलसेगा भारत; 25 लाख लोग होंगे गरीब!

दुनिया की नजरें भले ही इजरायल, ईरान और अमेरिका के मिसाइल हमलों पर टिकी हों, लेकिन इस युद्ध की सबसे खौफनाक मार अब भारत की रसोई और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाली है। जी हां संयुक्त राष्ट्र की एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसने पूरी दुनिया में खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट का दावा है कि पश्चिम एशिया का यह बारूद भारत के 25 लाख लोगों को गरीबी की गहरी खाई में धकेलने वाला है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद क्या हुआ, मानो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को लकवा मार गया है। तेल की तपिश, गैस की किल्लत और महंगाई का वो तूफान आने वाला है जो मिडिल क्लास को लोअर क्लास और गरीबों को और गरीब बनाने की ताकत रखता है। 

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने अपनी ताजी रिपोर्ट में कुछ ऐसे आंकड़े पेश किए हैं जो बेहद डरावने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध के कारण दुनिया भर में 88 लाख लोग अपनी आजीविका खोकर गरीबी के जाल में फंस सकते हैं। इस पूरे क्षेत्र को लगभग 299 अरब डॉलर का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। वहीं भारत में गरीबी की दर 23.9% से बढ़कर 24.2% हो सकता है। इसका सीधा मतलब है कि 24,64,698 भारतीय रातों-रात अपनी न्यूनतम आय खोकर गरीबी रेखा के नीचे चले जाएंगे। 

आपको बता दें भारत इस संकट में इसलिए सबसे ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि हमारी रग-रग पश्चिम एशिया से जुड़ी है। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 90% तेल आयात करता है, जिसमें से 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी सीधे पश्चिम एशिया से आता है। अगर होर्मुज का रास्ता बंद रहा, तो गाड़ियों का पहिया थम सकता है और रसोई की आग महंगी हो जाएगी। वहीं भारत के 45% उर्वरक का आयात इसी युद्ध क्षेत्र से होता है। जून में खरीफ की फसल की बुआई होनी है। अगर खाद नहीं मिली, तो खेती चौपट होगी और थाली से रोटी गायब हो सकती है। साथ ही LNG महंगी होने के कारण भारत को मजबूरी में कोयले की ओर भागना पड़ रहा है, जो पर्यावरण के लिए भी बुरा है। 

आपको बता दें भारत सिर्फ तेल नहीं मंगाता, बल्कि वहां से भारी मात्रा में 'पैसा' भी आता है। जी हां खाड़ी देशों में 93.7 लाख भारतीय रहते हैं। भारत में आने वाले कुल विदेशी धन का 38-40% इन्हीं देशों से आता है। अगर वहां हालात बिगड़े, तो रेमिटेंस कम होगा और करोड़ों परिवारों का गुजारा मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट कहती है कि यह सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह भारत की तरक्की को पीछे धकेल देगा। भारत के मानव विकास सूचकांक की बढ़ोतरी में 0.03 से 0.12 वर्ष तक की गिरावट आ सकती है। यानी जो विकास हमें आज मिलना था, वह कई महीनों पीछे खिसक जाएगा। 

ऐसे में जाहिर है कि मिसाइलें भले ही इजरायल और ईरान के आसमान में गरज रही हों, लेकिन उसका कंपन भारत के उन 25 लाख घरों में महसूस किया जाएगा जिनकी आजीविका संकट में है। ऐसे में अगर जल्द ही शांति नहीं हुई, तो मंदी और गरीबी का यह वायरस तेल की कीमतों के जरिए हर हिंदुस्तानी के घर में घुस जाएगा। यह युद्ध सिर्फ सरहदों का नहीं, बल्कि हर आम आदमी की थाली और बैंक बैलेंस का भी है! 

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