इटावा में पुलिस की 'तीसरी आँख' का महा-धमाका: खोए सुहाग के प्रतीक के लिए खाकी बनी मसीहा
इटावा : इसे किस्मत का खेल कहें या एसएसपी श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव के 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' का चाक चौबंद पहरा, लेकिन आज जो हुआ उसने इटावा पुलिस का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज कर दिया है! यह कहानी महज एक गुम हुए पर्स की नहीं है,बल्कि एक महिला की उम्मीदों और खाकी के अटूट विश्वास की जीत है।
कन्नौज की श्रीमती अंजू अपनी आँखों में आगरा के सपने लिए इटावा रेलवे स्टेशन पर उतरती हैं, लेकिन तभी एक पल की चूक और उनका कीमती पर्स जिसमें उनकी मेहनत की कमाई और सबसे अनमोल सुहाग की निशानी सोने का मंगलसूत्र था जो भीड़ के शोर में कहीं गुम हो जाता है अगर जनपद पुलिस तत्परता न दिखाती तो। 5 मई से 9 मई तक का वह वक्त अंजू के लिए किसी बुरे सपने जैसा था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि पर्दे के पीछे थाना सिविल लाइन पुलिस एक ऐसा चक्रव्यूह रच रही है जिससे सच बचकर नहीं जा सकता।
पुलिस ने सीसीटीवी की हजारों फ्रेमों को ऐसे खंगाला जैसे समुद्र से मोती ढूँढना हो। 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' की उन डिजिटल आँखों ने आखिरकार उस ऑटो चालक को बेनकाब कर ही दिया, जिसके पास वह पर्स था।
आज जब थाना सिविल लाइन के परिसर में अंजू को उनका खोया हुआ मंगलसूत्र और नकदी वापस मिली, तो मानों वक्त ठहर गया। उनकी आँखों से बहते आँसू और कांपते हाथों से दी गई दुआएं पुलिस के लिए किसी मेडल से कम नहीं थीं। अंजू के परिजनों के पास शब्द कम पड़ गए, बस एक ही गूँज थी— "धन्य है उत्तर प्रदेश पुलिस।"
इटावा पुलिस का सीधा संदेश: "अपराधी हो या अनहोनी, हमारी नजरों से कुछ नहीं बचता। हम सजग हैं, हम सख्त हैं, और हम आपके लिए हमेशा तत्पर हैं।"
रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह
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