रविवार को टूटा बरसों का गतिरोध: इटावा पुलिस के ‘मिशन शक्ति’ ने बिखरे चेहरों पर लौटाई मुस्कान, चार परिवारों की बची गृहस्थी
इटावा : जब दो दिलों के बीच दूरियां इस कदर बढ़ जाएं कि कोर्ट-कचहरी और अलगाव ही आखिरी रास्ता दिखने लगे, तब संवाद और समझदारी का एक हाथ डूबती कश्ती को तिनके का सहारा दे देता है। कुछ ऐसा ही भावुक और दिल को छू लेने वाला नजारा आज रविवार को जनपद इटावा के महिला थाने में देखने को मिला, जहां पुलिस की सूझबूझ और काउंसलिंग की ताकत ने चार बिखरते परिवारों को तबाही के मोड़ से वापस लाकर एक दूजे के गले मिलवा दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक नगर श्री अभयनाथ त्रिपाठी व अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री श्रीश चन्द्र के संवेदनशील मार्गदर्शन में चल रहे 'परिवार परामर्श केंद्र ,नई-किरण' कार्यक्रम के तहत आज रविवार को एक बेहद रोमांचक और भावनात्मक मोड़ आया। अक्सर पुलिस की छवि सख्त और डराने वाली होती है, लेकिन यहाँ महिला थाना प्रभारी सुश्री प्रीति सेंगर, उप निरीक्षक आकांक्षा सिंह, बृजेंद्र बहादुर सिंह और काउंसलर चित्रा परिहार व नमिता तिवारी की टीम ने एक अलग ही रूप दिखाया। उन्होंने कानूनी डंडे के बजाय रिश्तों की अहमियत समझाकर रूठे हुए जोड़ों के दिलों को पिघला दिया।
आज जब कुल 31 फाइलों पर सुनवाई शुरू हुई, तो माहौल में तनाव और भारीपन था। कई जोड़ों के चेहरे पर गुस्सा और आंखों में आंसू थे। घंटों चली मैराथन काउंसलिंग, मान-मनौव्वल और दोनों पक्षों को करीब लाने की अनथक कोशिशों के बाद आखिरकार वो पल आया जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
उदी मोड़ की शिवानी और आदित्य, लखना की दीपिका और अंशुल, सिविल लाइन की शोभा और राजवीर, तथा औरैया से आईं शिवानी और उनके पति ध्रुव कुमार—जो कभी एक-दूसरे का मुंह तक नहीं देखना चाहते थे—वे आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक बार फिर सात जन्मों के बंधन को निभाने के लिए राजी हो गए। जब इन चारों जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामा, तो महिला थाने का परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और अपनों की सिसकियों से गूंज उठा। 'मिशन शक्ति-5.0' का यह द्वितीय चरण सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि टूटते घरों को आबाद करने का एक जीता-जागता चमत्कार साबित हुआ।
इस बेहद भावुक सफलता के बाद इटावा पुलिस ने आम जनता से एक बेहद मार्मिक अपील की है कि छोटी-छोटी बातों को जिद न बनाएं, बल्कि संवाद और समझदारी से सुलझाएं। क्योंकि परिवार ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है और मजबूत परिवार से ही एक सुरक्षित समाज की नींव पड़ती है।
रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह
No Previous Comments found.