जब टूटने लगे रिश्ते और बिखरने लगे आशियाने तब मसीहा बनी इटावा पुलिस

इटावा‌ - जिंदगी की छोटी-छोटी गलतफहमियां और मामूली तकरारें जब अपनों को अपनों से ही दूर करने लगती हैं, तब दिल का दर्द बयां करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल आती है। कुछ ऐसा ही दिल को छू लेने वाला चमत्कार जनपद इटावा में देखने को मिला, जहां एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक नगर अभयनाथ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में 'परिवार परामर्श केंद्र' और 'नई किरण' कार्यक्रम किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ। मिशन शक्ति अभियान-5.0 के तहत चल रही इस अनूठी पहल ने आज एक बार फिर साबित कर दिया कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और सही मार्गदर्शन से उजड़ते हुए घरों को फिर से आबाद किया जा सकता है।

आज महिला थाना इटावा में माहौल कुछ अलग ही तनाव और उम्मीद के बीच झूल रहा था। राहतपुरा कॉलोनी के रहने वाले शिवानी और विश्वप्रताप, ऊसराहार के दीपमाला और सतेन्द्र कुमार, नया बस स्टैंड की नीलू और सचिन, गाड़ीपुरा की आफरीन और आसिफ, तथा जसवंतनगर के रिंकी और राजकुमार—इन पांचों परिवारों के रिश्तों की डोर इतनी कमजोर हो चुकी थी कि ऐसा लग रहा था मानो अब साथ हमेशा के लिए छूट जाएगा। दिलों में दूरियां थीं और आंखों में मायूसी। लेकिन कहते हैं कि सही समय पर की गई सही पहल सब कुछ बदल सकती है। महिला थाना प्रभारी सुश्री आकांक्षा सिंह, उप निरीक्षक बृजेंद्र बहादुर सिंह, और काउंसलर चित्रा परिहार व नमिता तिवारी की आत्मीय और धैर्यपूर्ण काउंसलिंग ने यहां जादू का काम किया। पुलिस की टीम ने किसी सख्त अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक परिवार के मुखिया की तरह दोनों पक्षों की पीड़ा को सुना, उनके गिले-शिकवे दूर किए और उन्हें समझाया कि जीवन में अहंकार और छोटी-छोटी बातें रिश्तों से बढ़कर नहीं हो सकतीं।

यह इटावा पुलिस के मानवीय दृष्टिकोण और उनकी संवेदनशील पहल की ही जीत थी कि कुछ ही घंटों की समझाइश के बाद कड़वाहट की बर्फ पिघल गई। सभी पांचों जोड़ों ने अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और हंसी-खुशी अपने परिवार को नई शुरुआत दी। जब ये पांचों परिवार अपने बिखरे हुए आशियानों को फिर से जोड़कर महिला थाने से बाहर निकले, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं लेकिन चेहरे पर सुकून और खुशी की चमक थी। इटावा पुलिस का यह कदम आज समाज के लिए एक खूबसूरत संदेश बन गया है कि परिवार समाज की सबसे बड़ी और अनमोल ताकत है, जिसे संवाद और समझदारी से हर हाल में बचाए रखना चाहिए।

रिपोर्टर - देवेन्द्र सिंह

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