लाल आतंक से मुक्त हुई बस्तर की पावन धरा; पूर्व विधायक संतोष बाफना ने गृह मंत्री अमित शाह का जताया आभार

जगदलपुर : बस्तर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित '31 मार्च 2026' की समय-सीमा से पूर्व ही बस्तर से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन की ऐतिहासिक सफलता पर हर्ष का माहौल है। इस उपलब्धि पर जगदलपुर विधानसभा के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता संतोष बाफना ने खुशी जाहिर करते हुए इसे "संकल्प की सिद्धि" करार दिया है।
बाफना ने एक पत्र के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है और साथ ही भविष्य के 'समरस बस्तर' के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण विजन और सुझाव साझा किए हैं।
दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस की जीत
पूर्व विधायक बाफना ने कहा कि दशकों से खूनी संघर्ष झेल रहे बस्तर में शांति का यह सूरज गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस की बदौलत ही संभव हो पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा "शासन की जीरो टॉलरेंस नीति और विकासपरक दृष्टिकोण ने आदिवासियों के मन में सुरक्षा और विश्वास का नया संचार किया है। इसके लिए संपूर्ण बस्तर अंचल गृह मंत्री और हमारे वीर जवानों का ऋणी है।"
'समरस बस्तर' के लिए बाफना के महत्वपूर्ण सुझाव
नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर को सामाजिक स्थिरता और सर्वांगीण विकास की पटरी पर लाने के लिए संतोष बाफना ने गृह मंत्री को कुछ अहम सुझाव प्रेषित किए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के 'वर्ग-संघर्ष' की स्थिति निर्मित न हो:
सामाजिक समरसता समितियों का गठन: ग्राम और जिला स्तर पर 'शांति एवं संवाद समितियों' का निर्माण किया जाए, जिसमें सभी समाज प्रमुखों की सक्रिय भागीदारी हो।
पारदर्शी विवाद निवारण तंत्र: भूमि, संसाधनों और अधिकारों से जुड़े संभावित छोटे विवादों को आपसी बातचीत और कानूनी जागरूकता से सुलझाने के लिए एक सिस्टम बनाया जाए।
संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण: वनाधिकारों और अन्य संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, ताकि किसी भी वर्ग में असुरक्षा की भावना न रहे।
विकसित बस्तर के लिए विशेष पैकेज की मांग पत्र के अंत में बाफना ने कहा कि नक्सलवाद का अंत केवल एक पड़ाव है, असली लक्ष्य एक 'समृद्ध और विकसित बस्तर' बनाना है। उन्होंने गृह मंत्री से मांग की है कि बस्तर को अब भय और भेदभाव से मुक्त कर प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज और निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
बाफना का मानना है कि इन प्रयासों से बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के सामने सामाजिक समरसता और विकास का एक अनूठा उदाहरण भी पेश करेगा।

रिपोर्टर : विवेक

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