27 अक्टूबर से संभावित चक्रवात को लेकर प्रशासन अलर्ट
जगदलपुर - प्रदेश में 27 अक्टूबर से संभावित चक्रवात के प्रभाव, भारी बारिश, जलभराव और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए शासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। चक्रवाती प्रभाव से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर की गई पूर्व तैयारी आपदा के अनुमान से कहीं अधिक मजबूत होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में जान-माल का नुकसान न हो और जीरो कैजुअल्टी का लक्ष्य हर हाल में सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में जल संसाधन विभाग की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए बताया गया कि प्रदेश के 46 प्रमुख जलाशय शत-प्रतिशत भरे हुए थे। चक्रवात के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश से बाढ़ की स्थिति निर्मित न हो और अतिरिक्त पानी के दबाव को संतुलित रखा जा सके, इसके लिए इन जलाशयों से करीब 22 से 23 प्रतिशत पानी पहले ही नियंत्रित रूप से छोड़ दिया गया है। अधिकारियों को जलाशयों में पानी के संचयन और सुरक्षित निकासी के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा गया है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव का खतरा न बने। इसके साथ ही, किसानों की कटी हुई फसलों को भीगने से बचाने, बागवानी फसलों की बुवाई में आवश्यक फेरबदल करने और पशुधन की सुरक्षा के संबंध में जारी एडवाइजरी का कड़ाई से पालन कराने पर बल दिया गया।
चक्रवात के मद्देनजर विशेष रूप से दक्षिण बस्तर के अत्यधिक संवेदनशील जिलों में सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर में निचले इलाकों से नागरिकों को समय रहते सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टरों को अधिकार दिया गया है कि वे पूरे जिले में एकतरफा आदेश देने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और संभावित जलभराव का आकलन कर प्राथमिक विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवश्यकतानुसार अवकाश घोषित करें। इसके साथ ही स्वास्थ्य अमले को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जिसके तहत सभी जिला अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था रखने और प्रसव की संभावित तिथि वाली गर्भवती महिलाओं व गंभीर मरीजों को पहले से ही स्वास्थ्य केंद्रों में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चक्रवाती तूफान के दौरान बुनियादी नागरिक सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए बिजली और दूरसंचार विभागों को विशेष मुस्तैदी बरतने को कहा गया है, ताकि खंभे या पेड़ गिरने की स्थिति में विद्युत आपूर्ति और संचार नेटवर्क को तत्काल बहाल किया जा सके। मार्गों को निर्बाध रखने के लिए गिरे हुए पेड़ों को तेजी से हटाने हेतु तकनीकी दल तैनात रहेंगे। राहत और बचाव कार्यों को मजबूती देने के लिए राज्य में तैनात एसडीआरएफ की टीमों के साथ-साथ एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें भी बुलाई गई हैं। इसके अतिरिक्त जिलों को राहत कार्यों और तात्कालिक सहायता के लिए लगभग 31 करोड़ की राशि जारी की जा रही है। इस नाजुक परिस्थिति में पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय और जवाबदेह बनाए रखने के लिए फील्ड अमले के सामान्य अवकाश निरस्त कर उन्हें अपने-अपने मुख्यालयों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का कड़ा आदेश दिया गया है।
रिपोर्टर - सैयद गौस

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