जयपुर में BJP के 8 मुस्लिम उम्मीदवारों का क्या हुआ? 4 को मिली हार
राजस्थान के निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा निगाहें जयपुर नगर निगम के नतीजों पर टिकी हैं। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 11 सितंबर 2026 को हुए मतदान के बाद सोमवार को मतगणना जारी है। विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारने वाली बीजेपी ने इस बार स्थानीय निकाय चुनाव में 8 मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारा है। बीजेपी की इस रणनीति पर सियासी गलियारों में खास नजर बनी हुई है।
हालांकि, जयपुर नगर निगम के मुस्लिम बहुल वार्डों में बीजेपी का यह दांव फिलहाल उम्मीद के मुताबिक सफल होता नजर नहीं आ रहा है। बीजेपी के 8 मुस्लिम उम्मीदवारों में से 4 चुनाव हार चुके हैं, जबकि बाकी उम्मीदवारों में भी कई पीछे चल रहे हैं।
बीजेपी प्रत्याशी जाकिर खान कायमखानी को जयपुर नगर निगम के वार्ड 109 में हार का सामना करना पड़ा। यहां निर्दलीय प्रत्याशी रहीस खान ने जीत दर्ज की। वार्ड 117 से बीजेपी प्रत्याशी शबाब जहां उर्फ शब्बो को कांग्रेस की संजीदा बेगम ने शिकस्त दी। वहीं वार्ड 128 से बीजेपी के माजिद खान पठान चुनाव हार गए और निर्दलीय प्रत्याशी इशहाक मंसूरी ने जीत दर्ज की। वार्ड 146 से बीजेपी प्रत्याशी अफसाना को भी हार का सामना करना पड़ा, जहां कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है।
वहीं बीजेपी प्रत्याशी शाहनवाज अंसारी वार्ड 19 से चुनाव मैदान में हैं, जहां अभी नतीजा घोषित नहीं किया गया है। शाहनवाज अंसारी पर बीजेपी ने दोबारा भरोसा जताया है। वर्ष 2020 के निकाय चुनाव में वह महज कुछ सौ वोटों से पीछे रह गए थे, जिसके चलते इस सीट के नतीजे पर खास नजर बनी हुई है।
वार्ड 136 से बीजेपी प्रत्याशी मिजाना मिर्जा के मुकाबले कांग्रेस उम्मीदवार आगे चल रहा है। वार्ड 113 में बीजेपी प्रत्याशी फरीदुद्दीन 'जैकी' के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं। वार्ड 137 से बीजेपी प्रत्याशी रहीस मंसूरी के चुनाव परिणाम को लेकर भी निगाहें टिकी हुई हैं।
जयपुर नगर निगम के मुस्लिम बहुल वार्डों में कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार बीजेपी के मुस्लिम चेहरों को कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस ने अपने मजबूत स्थानीय नेटवर्क और परंपरागत आधार के दम पर कई सीटों पर बढ़त बनाई है। हालांकि, बीजेपी उम्मीदवारों ने भी कुछ वार्डों में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाकर मुकाबले को त्रिकोणीय और रोचक बना दिया है।
स्थानीय निकाय चुनाव में 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। अब जयपुर के नतीजे यह तय करेंगे कि पार्टी की यह रणनीति कितनी सफल रही और मुस्लिम बहुल वार्डों में बीजेपी के नए प्रयोग का मतदाताओं पर कितना असर पड़ा।
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