'बाल उत्सव 2.0' की गूंज, बच्चों ने कहानियों और कॉमिक्स से उकेरी सफलता की इबारत
जालौन - जनपद के बच्चों की रचनात्मकता,आत्मविश्वास और स्वाभिमान को नया आकाश देने के उद्देश्य से उरई स्थित साई पैलेस में 'प्रगति स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0' बाल उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शानदार आगाज मुख्य अतिथि जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसने न केवल उत्सव की शुरुआत की बल्कि जनपद के नन्हे सितारों के सपनों को नई रोशनी प्रदान की। इस विशेष समारोह में जनपद के समस्त विकास खंडों से चयनित पाँच-पाँच मॉडल मीना मंचों के साथ-साथ 8 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राओं ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ प्रतिभाग किया। आयोजन का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत वे स्वलिखित कहानियाँ रहीं, जिनमें उन्होंने अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को शब्दों में पिरोया था। इसके साथ ही, स्वयं निर्मित कॉमिक बुक के माध्यम से बच्चों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का ऐसा प्रभावशाली प्रदर्शन किया कि उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में भी छात्र-छात्राओं ने सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों पर अपनी कूची से सशक्त संदेश उकेरे।
समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बेहद संजीदगी के साथ कहा कि मीना मंच महज एक औपचारिक मंच नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अरमानों, उनके भीतर छिपे आत्मविश्वास और स्वाभिमान को सशक्त बनाने का एक जीवंत माध्यम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब बच्चे स्वयं अपनी कहानी लिखते हैं, अपनी कॉमिक तैयार करते हैं और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर बेबाकी से अपने विचार रखते हैं, तो वे केवल प्रतिभागी नहीं रह जाते, बल्कि समाज में परिवर्तन के असली वाहक बनकर उभरते हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का वास्तविक ध्येय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि बच्चों में नेतृत्व कौशल, अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करना है। उन्होंने विशेष रूप से मीडिया के आदर्श स्वरूप और हानिकारक 'बॉडी टॉक' जैसे विषयों पर बच्चों की गहरी समझ की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि यही जागरूकता भविष्य के एक सशक्त और समतामूलक समाज की असली नींव है। प्रतियोगिताओं के क्रम में निर्णायक मंडल द्वारा सूक्ष्मता से मूल्यांकन करते हुए प्रत्येक श्रेणी में पाँच-पाँच उत्कृष्ट प्रतिभागियों का चयन मंडल स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया गया। 'पोस्टर मेकिंग' और 'मेरे बदलाव की कहानी' वर्ग में असाधारण प्रदर्शन करने वाले बच्चों की प्रतिभा को विशेष रूप से सराहा गया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जिला नोडल डॉ. ममता स्वर्णकार, मास्टर ट्रेनर डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार शुक्ला, मनीष कुमार ओझा, निधि सिंहा और विपिन उपाध्याय को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही समस्त प्रतिभागी बच्चों, नोडल शिक्षकों और सुगमकर्ताओं को भी उनकी मेहनत के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। खंड शिक्षा अधिकारी प्रीति राजपूत एवं डीसी बालिका नैना सेंगर के कुशल निर्देशन में संपन्न हुए इस बाल उत्सव ने यह साबित कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा, अवसर और प्रोत्साहन मिले, तो वे न केवल स्वयं प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं। इस आयोजन का मूल उद्देश्य उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित 'सेल्फ-स्ट्रीम'और 'मीना मंच' की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सपनों का उत्सव मनाना और उनके व्यक्तित्व को निखारना रहा,जिसमें शिक्षा विभाग पूरी तरह सफल दिखा।
रिपोर्टर - राहुल कुमार पटेल


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