राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय की सरिता: 2.36 लाख से अधिक मामलों का आपसी सुलह से निस्तारण
उरई (जालौन) : जनपद में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया गया, जिसमें आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर न्यायालयों एवं जिला प्रशासन के कुल 2,36,804 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत विवादों के त्वरित और अंतिम समाधान का सबसे सशक्त माध्यम है, जिससे पक्षकारों के धन और समय दोनों की बचत होती है। जनपद की सभी तहसीलों में स्थित दीवानी न्यायालयों में भी यह आयोजन पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जिसमें न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाम्भवी-प्रथम ने लोक अदालत की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आज अकेले जिला जज स्तर पर 25 मुकदमों का निस्तारण किया गया और पक्षकारों को 1,00,45,416 रुपये की धनराशि दिलाई गई। इसी क्रम में पारिवारिक विवादों को सुलझाने में भी बड़ी सफलता मिली, जहां कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह गौतम ने 24 मामलों का निस्तारण किया, जिसमें पांच वैवाहिक मामले प्रीलिटिगेशन स्तर के रहे। वहीं, अपर कुटुंब न्यायाधीश प्रवीण कुमार पाण्डेय ने 45 मुकदमों का निस्तारण कर परिवारों को टूटने से बचाया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार वशिष्ठ ने पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए 79 मामलों में बीमा कंपनियों से 1,84,14,000 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि स्वीकृत कराई। उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार ने 10 मुकदमों के माध्यम से याचियों को 45,52,133 रुपये दिलवाए, जबकि स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राजवर्धन गुप्ता ने 04 मामलों में सुलह कराई।
विद्युत चोरी और राजस्व संबंधी मामलों में भी व्यापक निस्तारण देखने को मिला। विशेष न्यायाधीश (ई.सी. एक्ट) पारूल पंवार ने विशेष प्रयास करते हुए विद्युत अधिनियम के 393 मुकदमों का निपटारा किया। फौजदारी और सिविल वादों के क्षेत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने सर्वाधिक 2909 आपराधिक वादों का निस्तारण कर बड़ी राहत दी। अपर जिला जज प्रथम सतीश चन्द्र द्विवेदी, विशेष न्यायाधीश अंकिता सिंह और एफटीसी न्यायाधीशों सहित जनपद के विभिन्न न्यायिक अधिकारियों जैसे अर्पित सिंह, मनाली चन्द्रा, और प्रत्यूष प्रकाश ने भी अपने-अपने न्यायालयों में सैकड़ों दीवानी और फौजदारी मामलों को आपसी समझौते से समाप्त कराया। कालपी, जालौन और माधौगढ़ स्थित बाह्य न्यायालयों में भी न्यायिक अधिकारी अभिषेक चौधरी, सुधांशु सिंह, जावेद खां, निकिता सिंह और विनय कुमार चाहर की पीठों द्वारा भारी संख्या में वादों का निस्तारण कर लाखों रुपये का राजस्व सरकारी कोष में जमा कराया गया।
न्यायालयों के साथ-साथ जिला प्रशासन ने भी इस अभियान में अभूतपूर्व सहयोग किया। जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट और सभी उप जिला मजिस्ट्रेट सहित तहसीलदार न्यायालयों ने राजस्व संहिता और फौजदारी के कुल 3145 मामलों का निपटारा किया। विभिन्न विभागों द्वारा प्री-लिटिगेशन प्रकृति के 2,27,345 मामले निस्तारित किए गए, जिनमें बैंक ऋण से संबंधित 545 समझौतों ने कर्जदारों को बड़ी राहत प्रदान की। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) सुरेश कुमार गुप्ता और पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश मुहम्मद कमर की उपस्थिति में आयोजित इस महा-अदालत ने जनपद में विधिक जागरूकता और न्याय के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। इस वृहद आयोजन के माध्यम से जहां हजारों परिवारों को वर्षों पुराने मुकदमों के बोझ से मुक्ति मिली, वहीं आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण समाज की स्थापना की दिशा में जनपद ने एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
रिपोर्टर : राहुल कुमार पटेल

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