गांव-गांव खुली ‘नल से जल’ की पोल?
उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन को लेकर राजनीति तेज हो गई है। हैरानी की बात यह है कि इस बार सवाल विपक्ष ने नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल के ही विधायक ने उठाए हैं। Brijbhushan Rajput, जो कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों का दौरा कर योजना के कार्यों का रियलिटी चेक किया। इस दौरान उन्हें कई स्थानों पर अधूरे काम, टूटी सड़कों और पाइपलाइन होने के बावजूद नलों में पानी न आने जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलीं।
विधायक ने गांवों का दौरा करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगहों पर इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि कई गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन आज तक नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
विधायक Brijbhushan Rajput ने कहा कि कई जगहों पर पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों को तोड़ दिया गया, लेकिन बाद में उनकी ठीक से मरम्मत नहीं कराई गई। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अगर लोगों तक पानी ही नहीं पहुंच रहा तो यह गंभीर जांच का विषय है।
इसी कारण विधायक ने पूरे मामले की एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं भी भ्रष्टाचार या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दूसरी ओर इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के Swatantra Dev Singh के नेतृत्व वाले जल शक्ति विभाग पर भी सवाल उठने लगे हैं। विभाग की जिम्मेदारी जल जीवन मिशन के कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन की है। ऐसे में बीजेपी के ही विधायक द्वारा उठाए गए सवालों ने प्रदेश की राजनीति को गर्म कर दिया है।
विपक्षी दलों को भी अब सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार योजनाओं का बड़े स्तर पर प्रचार तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि सत्तारूढ़ दल के विधायक ही योजना पर सवाल उठा रहे हैं तो इससे स्थिति की गंभीरता समझी जा सकती है।
ग्रामीणों का भी कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत उनके गांवों में पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन आज तक पानी की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हुई। कई जगहों पर नल लगाए गए हैं, लेकिन वे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर योजना पूरी तरह से लागू हो जाए तो उन्हें पानी के लिए दूर-दूर तक नहीं जाना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल जीवन मिशन जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता केवल कागजों पर काम दिखाने से नहीं बल्कि वास्तविक रूप से पानी पहुंचाने से तय होगी। यदि स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए और समय-समय पर रियलिटी चेक किया जाए तो योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकता है।
फिलहाल जल जीवन मिशन को लेकर उठे इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है।

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