PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी पड़ी भारी! पुलिस ने खोला साइबर जांच का मोर्चा
आज की इस खास रिपोर्ट में बात करेंगे एक ऐसे मामले की...जिसने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी है। जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन...जो पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था... अब एक नए विवाद के घेरे में आ गया है। मामला अब सिर्फ सड़क पर हुए प्रदर्शन तक सीमित नहीं है...बल्कि ये सोशल मीडिया, साइबर जांच और पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुरक्षाबलों के खिलाफ कथित अभद्र भाषा वाले पोस्ट और वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्शन शुरू कर दिया है। पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान करने में जुट गई है, जहां से कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किए गए।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से ऐसे अकाउंट्स की पूरी जानकारी मांगी गई है। ऐसे में सवाल है कि क्या विरोध के नाम पर किसी भी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या सोशल मीडिया पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई होगी? और क्या इस पूरे मामले में राजनीति भी तेज होगी? क्योंकि इस कहानी में सिर्फ पुलिस कार्रवाई नहीं है...बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी, विरोध की मर्यादा और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी...तीनों बड़े मुद्दे जुड़े हुए हैं। तो आइए जानते हैं आखिर जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद ऐसा क्या हुआ कि दिल्ली पुलिस को सोशल मीडिया पर उतरना पड़ा?
दिल्ली का जंतर-मंतर हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का गवाह बना। छात्रों के मुद्दों और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान अचानक माहौल गरमा गया। लेकिन हद तो तब पार हो गई जब प्रदर्शन के नाम पर सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर बेहद भद्दी, गाली-गलौज और आपत्तिजनक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। अब दिल्ली पुलिस की साइबर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने इस पर ज़बरदस्त शिकंजा कसा है। पुलिस का कहना है कि संवैधानिक प्रमुखों को टारगेट करके दुर्भावनापूर्ण, झूठा और बदनाम करने वाला कंटेंट फैलाया जा रहा था। इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने एक कड़क FIR दर्ज कर ली है और जांच की आँच अब सीधे उपद्रवियों के घर तक पहुँचने वाली है!
वहीं दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X यानी पुराने ट्विटर को पत्र लिखकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए कहा है। पुलिस ने X से सिर्फ पोस्ट हटाने की मांग ही नहीं की...बल्कि उन अकाउंट्स को चलाने वाले लोगों की पूरी जानकारी भी मांगी है। पुलिस ने अकाउंट होल्डर्स का...
नाम...पता...कॉन्टैक्ट डिटेल...ईमेल आईडी...के साथ-साथ लॉगिन और लॉगआउट से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। यानी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ये पोस्ट किसने किए...कहां से किए...और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने सोशल मीडिया कंपनियों से यह भी कहा है कि संबंधित पोस्ट और वीडियो की जानकारी को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच आगे बढ़ाई जा सके।
आपको बता दें इस जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि उन्होंने ऐसे 400 से भी ज़्यादा सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान की है, जिनके तार पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे हैं! ये पाकिस्तानी और असमाजिक हैंडल्स जंतर-मंतर के स्टूडेंट प्रोटेस्ट और हिंसा के दौरान भारत में झूठी कहानियाँ, अफवाहें और डीप-फेक वीडियोज वायरल कर रहे थे ताकि देश का माहौल खराब किया जा सके। पुलिस की स्पेशल साइबर टीमें लगातार 24 घंटे ऑनलाइन स्कैनिंग कर रही हैं ताकि देश विरोधी और भड़काऊ कंटेंट बनाने वालों पर तुरंत नकेल कसी जा सके। वहीं अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर विरोध की सीमा क्या होनी चाहिए?
लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या विरोध के नाम पर किसी व्यक्ति...किसी संस्था...या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता है? यही वजह है कि यह पूरा मामला अब सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं रह गया है। यह बहस बन चुका है...अभिव्यक्ति की आजादी बनाम भाषा की मर्यादा की। एक तरफ पुलिस कार्रवाई की मांग करने वाले लोग हैं...तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। लेकिन अब जांच के बाद ही साफ होगा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन पोस्ट और वीडियो के पीछे असल सच्चाई क्या है।
आपको बता दें प्रदर्शन के दौरान कुछ लड़कियों के वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैले, जिनमें वे खुलेआम प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेहद भद्दी भाषा का इस्तेमाल करती दिख रही थीं। जब मामला बढ़ा, कानूनी तलवार लटकी और ट्रोलिंग शुरू हुई, तो बैकफुट पर आते हुए माफीनामे के वीडियो सामने आने लगे।
आपको बता दें सबसे ज्यादा चर्चा हुई हरियाणवी डांसर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर डिंपल चौधरी की। आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विवाद बढ़ने के बाद डिंपल चौधरी ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से वह हाथ जोड़कर माफी मांगती हैं। उन्होंने वायरल वीडियो को लेकर अफसोस जताया और कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। साथ ही उन्होंने अपील की कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।
आपको बता दें डिंपल चौधरी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह हरियाणवी स्टेज डांसर, अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर जानी जाती हैं। उन्होंने कई म्यूजिक एल्बम में काम किया है और सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। लेकिन जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो ने उन्हें अचानक विवाद के केंद्र में ला दिया। यानी एक तरफ दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों की पहचान कर रही है...तो दूसरी तरफ अलग-अलग राज्यों में भी सोशल मीडिया टिप्पणियों को लेकर पुलिस कार्रवाई शुरू हो गई है। यह पूरा मामला अब सिर्फ एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा।
कुल मिलाकर यह पूरा मामला अब एक बहुत बड़े सबक के रूप में सामने आया है! लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना, तख्तियां लहराना, नारे लगाना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है...लेकिन विरोध के आड़ में गाली-गलौज करना, किसी की गरिमा को ठेस पहुँचाना और देश में नफरत का माहौल बनाना अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि सरासर कानून का उल्लंघन है! फिलहाल दिल्ली पुलिस अब किसी को बख्शने के मूड में नहीं है, चाहे वो देश में बैठा कोई इन्फ्लुएंसर हो या सरहद पार बैठा कोई आदमी! अब देखना यह होगा कि X से जानकारी मिलने के बाद पुलिस की पहली गिरफ्तारी किसकी होती है। क्योंकि डिजिटल दौर में एक बात तय है...सोशल मीडिया पर कही गई हर बात सिर्फ कुछ सेकंड में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है...और इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है। अब नजरें पुलिस की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
No Previous Comments found.