अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन जौनपुर अपना चौथा और राष्ट्र का 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा
जौनपुर : आज यहाँ इस प्रागण में अपना यह अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन जौनपुर अपना चौथा और राष्ट्र का 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक सैन्य विजय का स्मरण नहीं, बल्कि उन अमर वीरों के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और अटूट राष्ट्रभक्ति को नमन करने का पावन अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों से भारत की एक-एक इंच भूमि को मुक्त करा कर राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा की। यह विजय भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य, अनुशासन, रणनीतिक कौशल और मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का स्वर्णिम अध्याय है।
कारगिल विजय दिवस भारतीय इतिहास में साहस, धैर्य और राष्ट्र प्रेम का प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष पूरा देश उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिन्होंने विश्व के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण युद्ध क्षेत्रों में से एक में असाधारण पराक्रम का परिचय दिया था। शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान, 16 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, दुर्गम पर्वतीय चोटियां, ऑक्सीजन की कमी और दुश्मन की लगातार गोलाबारी के बीच भारतीय सैनिकों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए वे किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। कारगिल की चोटियों पर फहराता तिरंगा आज भी साहस, राष्ट्रीय एकता और अडिग संकल्प का अमर प्रतीक है।
टोलोलिंग, टाइगर हिल, प्वाइंट 5140, प्वाइंट 4875 और खालूबार रिज जैसी चोटियां भारतीय वीरता की अमर पहचान बन गईं है। इन मोर्चों पर भारतीय सैनिकों ने लगभग सीधी खड़ी चट्टानों पर रात के अंधेरे में चढ़ाई कर दुश्मन के मजबूत बंकरों पर कब्ज़ा किया। अनेक युवा वीर सैनिको की कारगिल युद्ध के बाद भारत ने रक्षा तैयारियों, खुफिया समन्वय, सीमा अवसंरचना और सैन्य आधुनिकीकरण में व्यापक सुधार किए। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन, सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और सुरंग निर्माण, आधुनिक निगरानी प्रणाली तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने भारत की सामरिक क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है। कारगिल की भावना आज भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का आधार बनी हुई है। सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) तथा ऑपरेशन सिंदूर (2025) इस संकल्प के प्रतीक हैं कि भारत शांति का पक्षधर है ।
आज 27वें कारगिल विजय दिवस पर पूरे राष्ट्र के साथ यह अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन जौनपुर अपने शहरवासीयो के साथ उन अमर वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करता है, जिन्होंने असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी भारत की पवित्र भूमि की रक्षा की। उनका त्याग आज भी देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा, साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रेरित करता है। कारगिल केवल इतिहास का एक अध्याय ही नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद, सैन्य पराक्रम और देशभक्ति की अमर विरासत है।
समय बीत सकता है, युद्ध समाप्त हो सकते हैं, लेकिन मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों का साहस कभी समाप्त नहीं होता। इस कारगिल विजय दिवस पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन जौनपुर अपने शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को पुनः दोहराता है। इन अमर बलिदानियों की वीरता सदैव हम सब को प्रेरणा देती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति का शाश्वत प्रकाशस्तंभ बनी रहे
रिपोर्टर : शशिकांत मौर्य
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