पतंग के चाइनीस धागे से अबोल जीवों की करें रक्षा
झाबुआ : मकर संक्रांति एवं पतंग उत्सव के अवसर पर पतंग के पक्के (चाइनीज/नायलॉन) धागे से अबोल जीवों को होने वाली गंभीर चोटों और मृत्यु की घटनाओं को रोकने हेतु जीवदया अभियान द्वारा व्यापक रूप से जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत संगठन ने पतंग विक्रेताओं से अपील की है कि वे पक्का धागा न बेचें और केवल सूती धागे की बिक्री सुनिश्चित करें वही पतंगबाजी के शौकीन युवाओं से सूत के मांझे से पतंग उड़ाने की अपील की है ताकि वे क्रुणाभाव से अबोलें पक्षियों एवं अन्य जीवों की बेवजह जान के पाप से बच सके। इस अवसर पर जीवदया परिवार के राष्ट्रीय संयोजक पवन नाहर थांदला, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एम.एल. जैन (कंचन हॉस्पिटल, राजगढ़) एवं राष्ट्रीय मुख्य महासचिव मनीष कुमट (झकनावदा) ने संयुक्त रूप से कहा कि चाइना व नायलॉन का पक्का धागा अत्यंत खतरनाक होता है, इसके उपयोग से जहाँ अनेक बार बच्चोँ के अंगों को कटते देखा गया है वही आसमान में उड़ते पक्षियों के पंख, गर्दन और शरीर को घायल होते यहाँ तक कि अपनी जान गंवाते हुए भी देखा है। अभियान के पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि कई बार ऐसे धागों से राह चलते मुसाफिरों, दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी करते देखा है। यही कारण है कि इसे हमारें देश में प्रतिबंधित भी किया गया है।
जीवदया प्रेमियों ने कहा कि पतंगबाजी आनंद का पर्व है, इसे क्रूरता का कारण नहीं बनने देना चाहिए। यदि हम थोड़ी-सी सावधानी बरतें और पक्के धागे का बहिष्कार करें तो धर्म के सम्मुख होकर लाखों पक्षियों और जीवों की रक्षा कर सकते है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे भी पतंग उड़ाने के बाद बचे हुए धागों को खुले में न छोड़ें, बल्कि सुरक्षित तरीके से नष्ट करें। जीवदया परिवार के सदस्यों ने बाजार में दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें पक्के धागे से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी और स्वेच्छा से इसकी बिक्री बंद करने का अनुरोध किया। साथ ही आमजन से भी अपील की गई कि वे जीवदया के इस अभियान में सहभागी बनें और सूती धागे का ही उपयोग करें। अंत में संगठन ने संदेश दिया कि जीवों की रक्षा ही सच्चा उत्सव है, और सामूहिक प्रयासों से ही हम अपने आसपास के अबोल जीवों को सुरक्षित रख सकते हैं वही अपने देश के कानून का पालन भी कर सकते है व विदेशी ताकतों को भी मजबूत होने से बचा सकते है।
रिपोर्टर : मनीष कुमट


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