इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बवाल पर राजनीति गरमाई

झाबुआ : इंदौर शहर के भागीरथपूरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। इस दुखद घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जीवदया अभियान के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमट ने कहा कि इस संवेदनशील मामले में राजनीति करने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इस पर कुमट का कहना है कि इस समय लोगों को गुमराह करने या केवल विरोध प्रदर्शन और घेराव की राजनीति करने से ज़्यादा ज़रूरी है कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हुआ जाए। जो लोग ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं, उनके इलाज और आर्थिक सहायता के लिए ठोस प्रयास किए जाएँ। कुमट ने अपील की कि राजनीतिक दल यदि वास्तव में जनता के शुभचिंतक हैं, तो पीड़ितों की आर्थिक मदद करें, उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करें, हनुमान चालीसा पाठ, यज्ञ एवं अनुष्ठान जैसे सामूहिक धार्मिक व सामाजिक प्रयासों के माध्यम से सकारात्मक वातावरण बनाएँ। तभी यह माना जाएगा कि राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हित में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि केवल नेताओं, विधायकों, मंत्रियों और सांसदों के घेराव में राजनीतिक भविष्य तो दिखाई देता है, लेकिन बीमार और पीड़ित जनता की चिंता कहीं नज़र नहीं आती। यह बात कड़वी ज़रूर है, लेकिन सच्चाई भी यही है। फिलहाल प्रशासन द्वारा दूषित जल आपूर्ति के स्रोत की जाँच की जा रही है और प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था की गई है। वहीं, जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस संकट की घड़ी में राजनीति नहीं, बल्कि मानवता जीतती है या नहीं।

रिपोर्टर : मनीष

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