ओलावृष्टि से तबाही: बोलासा गांव की पूरी फसल नष्ट, किसानों ने कलेक्टर से मांगी राहत
झाबुआ : जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बोलासा में 2 फरवरी की शाम अचानक आई तेज आंधी, बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। शाम करीब 6 बजे शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा में गांव की अधिकांश कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं।
खेतों में खड़ी गेहूं, चना, तरबूज, लहसुन सहित अन्य फसलें जमीन से मिल गईं
किसानों के अनुसार ओलावृष्टि इतनी तीव्र थी कि खेतों में खड़ी गेहूं, चना, तरबूज, लहसुन सहित अन्य फसलें जमीन से मिल गईं। कई स्थानों पर फसल उखड़कर बह गई, जिससे उत्पादन शून्य रह गया। किसानों का कहना है कि इस मौसम में फसल ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन थी, लेकिन एक ही झटके में सब कुछ खत्म हो गया।
कर्ज में डूबे किसान, परिवार के भरण-पोषण की चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि फसल बोने के लिए बीज, खाद, दवा और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए गए थे। अब फसल नष्ट होने से किसान कर्ज चुकाने और परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो गए हैं। कई किसान साहूकारों और बैंकों से लिया गया ऋण लौटाने को लेकर गंभीर चिंता में हैं।
कलेक्टर को सौंपा आवेदन, सर्वे और मुआवजे की मांग
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए समस्त ग्रामवासी एवं ग्राम पंचायत बोलासा द्वारा झाबुआ कलेक्टर नेहा मीणा को लिखित आवेदन सौंपा गया है। आवेदन में मांग की गई है कि—प्रभावित क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराया जाए,फसल नुकसान का उचित मुआवजा प्रदान किया जाए,किसानों को आपदा राहत राशि एवं अन्य सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
प्रशासन से शीघ्र राहत की उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द सर्वे कराकर राहत प्रदान करेगा। किसानों का कहना है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली तो उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
प्रतिलिपि उच्च स्तर तक भेजी
किसानों द्वारा इस आवेदन की प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय विधायक, प्रभारी मंत्री, सांसद एवं इंदौर संभाग आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि समस्या का समाधान शीघ्र हो सके।
रिपोर्टर : मनीष कुमट

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