प्रधानमंत्री सड़क पर अवैध रेत परिवहन वाहनों का आतंक
झकनावदा - प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित झकनावदा–टिमायची मार्ग पर इन दिनों अवैध रेत परिवहन से जुड़े ओवरलोडिंग वाहनों की बेलगाम आवाजाही ने सड़क की हालत बद से बदतर कर दी है। नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे भारी-भरकम रेत लोडिंग वाहन न सिर्फ सड़क को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आम जनता की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं। हालात यह हैं कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, सड़क की साइड उखड़ गई है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
क्षमता से कई गुना अधिक वजन होने के कारण सड़क की सतह टूट रही
स्थानीय लोगों के अनुसार, रेत से भरे ओवरलोड डंपर दिन-रात इस मार्ग से गुजरते हैं। क्षमता से कई गुना अधिक वजन होने के कारण सड़क की सतह टूट रही है। कई स्थानों पर डामर पूरी तरह उखड़ चुका है, जबकि किनारे धंसने से सड़क संकरी हो गई है। रात के समय पर्याप्त संकेतक और रोशनी नहीं होने से दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह मार्ग जानलेवा साबित हो रहा है।
दुर्घटनाओं का डर, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में कई बार वाहन फिसलने और गड्ढों में गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों में भय का माहौल है। इसके साथ ही ग्रामीण ने बताया की कई रेत से भरे डंपर जो रात के अँधेरे में इस मार्ग से होकर गुज़रते हैं तो उनके वाहन नम्बर या तो एक ही होते है या कुछ डंफर के आगे पीछे के अंक मिटे होते हैं । बावजूद इसके संबंधित विभाग, परिवहन अमला और खनिज विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर जिम्मेदार अधिकारियों का मौन कई सवाल खड़े कर रहा है।
करोड़ों की सड़क पर फिर से मरम्मत का खतरा
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी इस सड़क पर सरकार द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, ताकि ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके। लेकिन अवैध रेत परिवहन माफिया की मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह सड़क समय से पहले ही जर्जर हो गई है। यदि यही हाल रहा तो जल्द ही इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो सकता है और फिर से भारी भरकम राशि मरम्मत में खर्च करनी पड़ेगी।
ग्रामीणों की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि झकनावदा–टिमायची मार्ग पर तत्काल ओवरलोडिंग वाहनों पर रोक लगाई जाए, अवैध रेत परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सड़क की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। साथ ही नियमित निगरानी और चेकिंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
प्रशासन कब नींद से जागता है
अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और प्रधानमंत्री सड़क को अवैध परिवहन के कहर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्टर - मनीष कुमट

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