झकनावदा भगोरिया हाट में भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों द्वारा गैर निकालकर प्रदर्शन

 झाबुआ : आदिवासी अंचल के प्रसिद्ध भगोरिया पर्व पर इस वर्ष झकनावदा हाट में उत्सव का रंग चरम पर नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल की गूंज और लोकनृत्य के बीच राजनीतिक दलों ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। भारतीय जनता पार्टी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों ने विशाल गैर निकालकर अपने जन समर्थन के साथ प्रदर्शन किया।

भाजपा की विशाल गैर, कार्यकर्ताओं में उत्साह

भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौड़ के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने भगोरिया हाट में पारंपरिक गैर निकाली। ढोल-मांदल की थाप पर कार्यकर्ता व ग्रामीण जमकर थिरके। साफा और पारंपरिक परिधानों में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। गैर पूरे हाट बाजार से होते हुए मुख्य मार्गों पर निकली । इस दौरान जनजाति अजजा मोर्चा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य अजमेरसिंह भूरिया माँदल बजाते और मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौड़,जिला पंचायत सदस्य अन्नू भूरिया,जनपद उपाध्यक्ष देवकुंवर पड़ियार,कालूसिंह चौहान,बाथू वास्केल आदि ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ नाचते हुए चल रहे थे । इस अवसर पर बड़ी संख्या भाजपा कार्यकर्ता एवं ग्रामीणजन मौजूद रहे।

कांग्रेस की गैर में उमड़ा जनसैलाब

वहीं वालसिंह मेड़ा (पूर्व विधायक) के नेतृत्व में कांग्रेस की ओर से भी भव्य गैर निकाली गई। बड़ी संख्या में आदिवासी समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। मांदल की थाप पर युवक-युवतियां गोल घेरा बनाकर नृत्य करते नजर आए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे जनसमर्थन का प्रतीक बताया।

लोक संस्कृति का अनूठा संगम

प्रतिवर्ष अनुसार भगोरिया हाट में झूले-चकरी, पारंपरिक आभूषण, रंग-बिरंगी पिचकारियां और ग्रामीण उत्पादों की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। युवा वर्ग ने पारंपरिक तरीके से गुलाल लगाकर एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूरे क्षेत्र में लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

प्रशासन की रही मुस्तैदी

भगोरिया हाट में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क नजर आया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। भगोरिया पर्व केवल एक मेला नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। झकनावदा हाट में भाजपा और कांग्रेस की सक्रिय भागीदारी ने इस बार उत्सव में राजनीतिक रंग भी घोल दिया, लेकिन केंद्र में रही तो मांदल की थाप और लोक उल्लास की गूंज।

रिपोर्टर : मनीष कुमट

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