भारत के राजनीतिक भविष्य निर्माण में मातृशक्ति की अहम भूमिका तय

झाबुआ : देश के राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लिया गया ऐतिहासिक निर्णय अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का जो महत्वपूर्ण कदम उठाया है, उसे भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। इस निर्णय से देश की मातृशक्ति को राजनीति में अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे न केवल महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा बल्कि शासन-प्रशासन में भी संवेदनशीलता और समावेशिता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण में सामाजिक सरोकारों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी। इसी कड़ी में पेटलावद की लोकप्रिय विधायक एवं मध्यप्रदेश शासन की महिला एवं बाल विकास विभाग की केबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने का सशक्त माध्यम बनेगा। मंत्री सुश्री भुरिया ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे गांव-गांव और शहर-शहर की माताएं-बहनें अब देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।” उन्होंने आगे कहा कि यह पहल नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। साथ ही उन्होंने इस फैसले के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र को और मजबूत करने वाला कदम बताया।

झाबुआ जिले सहित पूरे प्रदेश में इस निर्णय को लेकर महिलाओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने भी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताते हुए सराहा है।

रिपोर्टर : मनीष कुमट  

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