श्रीमद् भागवत कथा का हुआ भव्य समापन

झकनावदा (मनीष कुमट)। नगर के श्री कृष्ण मंदिर परिसर में विगत सात दिनों से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का बुधवार को धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस  विधि-विधानपूर्वक गीताजी पाठ, हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। इसके पश्चात श्रीमद् भागवत ग्रंथ एवं कथा वाचक की नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का रसपान सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित नेमिष्य नारायण व्यास के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने किया। कथा के सातों दिनों में नगर के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री कृष्ण मंदिर परिसर पहुंचे और भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया।

भागवताचार्य ने बताया भागवत का सार

कथा के दौरान भागवताचार्य पंडित नेमिष्य नारायण व्यास ने श्रीमद् भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार एवं भगवान की शरणागति का संदेश दिया। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रुक्मणी विवाह सहित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस से भाव-विभोर किया। कथा वाचक ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पवित्र ग्रंथ है। भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से हमें जीवन में कर्म, धर्म और कर्तव्य का महत्व सीखने को मिलता है।

शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

कथा के समापन अवसर पर श्रीमद् भागवत ग्रंथ को विधिवत पूजन-अर्चन के बाद शांतिलाल चौधरी ने श्रीमद् भागवत ग्रंथ को अपने सर पर उठाकर शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा में श्रद्धालु भक्ति गीतों एवं जयकारों के साथ शामिल हुए। नगर के विभिन्न मार्गों से निकली शौथायात्रा में भागवताचार्य पंडित नेमिष्य नारायण व्यास को घोड़े पर  बैठाकर नगर भ्रमण करवाया शोभायात्रा का जगह-जगह श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों ने स्वागत किया। शोभायात्रा के दौरान पूरा नगर “राधे-राधे”, “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धार्मिक आयोजन को भव्यता प्रदान की।

पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान

अंतिम दिवस कथा स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं हवन किया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर नगर, क्षेत्र एवं समस्त समाज की सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगलकामना की। पूर्णाहुति के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने नगर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा के समापन अवसर पर आयोजकों द्वारा कथा वाचक, सहयोगी सदस्यों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आयोजन में सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया गया। संपूर्ण सफल आयोजन में विशेष रूप से सुनील सुदामा मिस्त्री, ठाकुर भूपेंद्र सिंह राठौर सेमलिया,अनोखीलाल मिस्त्री,रतनलाल राठौड़,मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़,चितरंजन सिंह राठौर उमरकोट,झमकलाल अग्रवाल,दुर्गेश जोशी,सुखदेव पटेल,जगदीश राठौर,मांगीलाल राठौड़,अभिषेक बैरागी आदि का सराहनीय योगदान रहा।

रिपोर्टर - मनीष झाबुआ 

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