अफीम काशतकरों ने काले सोने को निकालने की प्रक्रिया प्रारम्भ की

झालावाड़ - बकानी क्षेत्र अंतर्गत रविवार से ही अफीम की फसल पर चिरई (लेटेक्स निकालने की प्रक्रिया) का कार्य अफीम पत्ताधारी कास्ट करो में प्रारंभ किया किसानों ने प्रारंभिक रीति रिवाज के साथ फसल की पूजा अर्चना के उपरांत काले सोने के नाम से विख्यात इस फसल पर पहले कीड़ा लगाया खेतों में सुबह से ही उत्साह का माहौल देखा गया ब्रह्मपुर गांव के किस डालचंद लोधानंद अवगत कराया की शुभ मुहूर्त में ईश्वर का स्मरण कर दोनों पर पहले कीड़ा लगाया गया उन्होंने कहा कि अफीम क्षेत्र की प्रमुख नगदी फसल है जो सैकड़ो किसने की आजीविका का आधार है अच्छी पैदावार से किसानों को आर्थिक मजबूती एवं समृद्धि मिलती है इसलिए इसे स्थानीय स्तर पर काला सोना कहा जाता है किसानों का कहना है कि चिरई प्रक्रिया में दोपहर के समय पोस्ट फल डोडो पर एक विशेष औजार से हल्का चीरा लगाया जाता है रात भर में निकलने वाला दूधिया लेटेक्स गधा होकर उसमें जम जाता है जिसे अगले दिन सुबह सावधानी पूर्वक खुरच करें इकट्ठा किया जाता है यह प्रक्रिया कई दिनों तक चरणबद्ध तरीके से चलती है इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है की चिर बहुत गहरा ना हो ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे और अफीम की गुणवत्ता बनी रहे ईश्वर से समय पर हुई वर्षा और ठंडक के कारण फसल की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद है इन दिनों खेतों में मजदूरों की व्यवस्थता बढ़ गई है जिससे ग्रामीण इलाकों में चहल-पहल देखी जा रही है किसानों का मानना है कि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत केवल लाइसेंस धारी किसान ही अफीम की खेती करते हैं और उत्पादन तय मानकों के अनुरूप किया जाता है पहले चेहरे के साथ ही क्षेत्र में फसल को लेकर किसानों की उम्मीदें और उपचार बढ़ गया है इस बार अफीम फसल में अच्छी अफीम काला सोना निकलने की उम्मीद जताई जा रही है

रिपोर्टर - रमेश चंद्र शर्मा

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