एलन से एम्स गए करने जन-उपचार। आला छोड़ अनुज चले, दिल्ली के दरबार॥

झालावाड़ - भारतीय प्रशासनिक सेवा (UPSC) का तिलिस्म ही कुछ ऐसा है कि यह अच्छे-अच्छे पेशेवरों की दिशा बदल देता है। अब तक आम धारणा यही थी कि शिक्षा की काशी 'कोटा' और विशेषकर 'एलन' की मशीनरी केवल ऐसे छात्र गढ़ती है जो या तो मरीजों की नब्ज टटोलते हैं या फिर मशीनों के पेंच कसते हैं। लेकिन, जब एलन के 'सकारात्मक संस्कारों' की भट्टी में तपा एक मेधावी छात्र एम्स से डॉक्टरी की डिग्री लेने के बाद अचानक गले से 'स्टेथोस्कोप' उतारकर 'दिल्ली के दरबार' (ब्यूरोक्रेसी) का रुख करता है, तो अच्छे-अच्छों के गणित हिल जाते हैं ।डॉ.अनुज अग्निहोत्री ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) लाकर ठीक ऐसा ही चमत्कार किया है। शायद एम्स से पास आउट होने के बाद ओपीडी में मरीजों का इलाज करते-करने की सोचने में बजाय अनुज को पूरे 'सिस्टम' का ही इलाज करने की सूझी, और उन्होंने सीधे देश की सबसे प्रतिष्ठित कुर्सी पर निशाना साध लिया। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता उन आलोचकों पर एक मीठा तंज है जो मानते हैं कि कोटा केवल रट्टू तोते तैयार करता है। अनुज ने यह साबित कर दिया है कि जब एलन की मजबूत नींव और विश्लेषणात्मक सोच किसी छात्र को मिलती है, तो वह केवल एक उत्कृष्ट डॉक्टर ही नहीं बनता, बल्कि देश का 'नीति-नियंता' और सबसे बड़ा प्रशासक बनने का भी माद्दा रखता है।आइए, रावतभाटा से निकले इस होनहार युवा की उस अजेय और प्रेरणादायक यात्रा का इंटरनेशनल एन.एल.पी. लाइफ एवं करियर कोच व युवा मैनेजमेंट विश्लेषक डॉ. नयन प्रकाश गांधी की पारखी दृष्टि से अवलोकन करें। आज पूरे भारत में न सिर्फ कोटा शिक्षा नगरी, बल्कि संपूर्ण राजस्थान का नाम रोशन करने वाले यूपीएससी के सिरमौर डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने एलन के क्लासरूम से जोधपुर एम्स तक और फिर  लबासना (LBSNAA) की वादियों तक सफलता का एक ऐसा 'प्रिस्क्रिप्शन' लिख दिया है, जिसे पढ़ना आज हर युवा के लिए जरूरी है:

नींव के पत्थर: रावतभाटा से एलन के प्रांगण तक

किसी भी गगनचुंबी इमारत के टिके रहने की असली वजह उसकी गहरी और मजबूत नींव होती है। डॉ. अनुज अग्निहोत्री की इस ऐतिहासिक सफलता के बीज वर्षों पहले तब बोए गए थे, जब राजस्थान के रावतभाटा जैसे छोटे से कस्बे से निकलकर एक युवा और मेधावी छात्र ने सपनों के शहर कोटा में कदम रखा था। अनुज ने मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए एलन करियर इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया। कोटा का माहौल अक्सर नए छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन एलन सिर्फ एक कोचिंग संस्थान नहीं है,यह एक ऐसा आधुनिक गुरुकुल है जहाँ शिक्षा के साथ-साथ 'सकारात्मक संस्कार' भी सींचे जाते हैं।

अनुशासन और एकाग्रता: एलन में बिताए गए शुरुआती वर्षों ने अनुज के भीतर अनुशासन, समय प्रबंधन और कभी हार न मानने का वह जज्बा पैदा किया, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। तनाव प्रबंधन (Stress Management): एलन के स्टडी के साथ आध्यात्म माहौल और वहां के गुरुजनों के सान्निध्य ने अनुज को यह सिखाया कि दबाव के क्षणों में खुद को शांत कैसे रखा जाए। एक छात्र के लिए यह मानसिक दृढ़ता किसी भी विषय के ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण होती है।

पहला कीर्तिमान: NEET और AIIMS में सफलता का डंका

एलन के मार्गदर्शन और अनुज की अथक मेहनत का पहला बड़ा और प्रत्यक्ष परिणाम मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सामने आया। लाखों परीक्षार्थियों की भारी भीड़ और गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बीच अनुज ने अपनी मेधा का परचम लहराते हुए अकल्पनीय सफलता प्राप्त की:

AIIMS प्रवेश परीक्षा: ऑल इंडिया रैंक 215 NEET-UG: ऑल इंडिया रैंक 306

यह रैंक हासिल करना कोई तुक्का या सामान्य घटना नहीं थी। यह एलन की उस अचूक शिक्षण पद्धति का सीधा प्रमाण था, जो हर छात्र के भीतर छिपी सर्वश्रेष्ठ क्षमता को निखार कर बाहर लाती है। इस शानदार सफलता के बाद अनुज ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, AIIMS जोधपुर में प्रवेश लिया और वहां से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल की पढ़ाई अपने आप में बेहद थकाऊ और चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन एलन में सीखी गई निरंतरता ने अनुज को यहाँ भी एक उत्कृष्ट और मेधावी छात्र बनाए रखा।

सपनो का विस्तार: चिकित्सा से प्रशासन की ओर एक वैचारिक छलांग

MBBS की डिग्री हासिल करने के बाद, अनुज के सामने एक सुरक्षित, आर्थिक रूप से सुदृढ़, सम्मानित और सफल चिकित्सा करियर बांहें फैलाए खड़ा था। वे चाहते तो जीवन भर एक बेहतरीन सर्जन या फिजिशियन बनकर शान की जिंदगी जी सकते थे। लेकिन जिनके सपनों का कैनवास बहुत बड़ा होता है, वे एक मुकाम पर आकर रुकते नहीं हैं।अनुज ने अपने क्लिनिकल अनुभवों के दौरान यह गहराई से महसूस किया कि एक डॉक्टर बनकर वे एक दिन में कुछ सौ मरीजों का इलाज कर सकते हैं, लेकिन यदि वे प्रशासनिक सेवाओं में जाते हैं, तो उनके एक नीतिगत फैसले  से लाखों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आ सकता है। प्रशासनिक सेवाओं का दायरा बहुत व्यापक है, यह स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा, शहरीकरण, समाज कल्याण और अर्थव्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर बदलाव लाने का अधिकार देता है। इसी उच्च और व्यापक उद्देश्य के साथ उन्होंने उस रास्ते पर कदम रखा, जिसे भारत में सबसे कठिन माना जाता है,UPSC की राह!

UPSC का चक्रव्यूह और काम आए एलन के 'सकारात्मक संस्कार'

UPSC का पाठ्यक्रम किसी अथाह और गहरे समुद्र की तरह विशाल है। एक साइंस और मेडिकल के विशुद्ध छात्र के लिए इतिहास की तारीखें, भूगोल के नक्शे, अर्थशास्त्र के उलझे हुए सिद्धांत, समाजशास्त्र और लोक प्रशासन जैसे मानविकी विषयों पर पकड़ बनाना एक भगीरथ प्रयास था। यह बिल्कुल वैसी ही स्थिति थी जैसे किसी को अचानक उल्टे हाथ से लिखना पड़े।
यहीं पर अनुज की वह 'नींव' काम आई जो एलन में तैयार हुई थी:

कठिन से कठिन विषयों को छोटे-छोटे और तार्किक हिस्सों में बांटकर समझना। घंटों तक एक जगह बैठकर बिना विचलित हुए पढ़ाई करने का स्टेमिना  लक्ष्य के प्रति अडिग रहना और असफलताओं से घबराने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण करना।ये सभी गुण अनुज के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा एलेन के दिनों से ही बन चुके थे। इन संस्कारों ने अनुज को यूपीएससी के लंबे, थका देने वाले और एकाकी सफर में भटकने नहीं दिया। और अंततः, जब परिणाम घोषित हुए, तो पूरे देश ने स्तब्ध होकर देखा कि कैसे एक डॉक्टर, जो मूल रूप से 'एलन का स्टूडेंट' था, पूरे देश का सिरमौर बन गया। ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल कर अनुज अग्निहोत्री ने सिद्ध कर दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।

"एलेन है तो मुमकिन है" - एक सिद्ध सत्य और बदलती धारणा

अनुज अग्निहोत्री की यह सफलता इस बात का सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण है कि "एलन है तो मुमकिन है।" आमतौर पर समाज और मीडिया में यह माना जाता था कि एलन की विशेषज्ञता केवल इंजीनियरिंग (IIT-JEE) और मेडिकल (NEET) की तैयारी तक ही सीमित है। लेकिन अनुज के इस परिणाम ने सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। यह परिणाम दो बातें स्पष्ट रूप से साबित करता है:

1. सीखने की कला (Art of Learning): एलन अपने छात्रों को सिर्फ विषय रटना नहीं सिखाता, बल्कि उन्हें 'सीखने की कला' सिखाता है। एक बार जब कोई छात्र इस कला को आत्मसात कर लेता है, तो उसके लिए कोई भी परीक्षा या कोई भी क्षेत्र असंभव नहीं रह जाता।
2. बहुआयामी नेतृत्व क्षमता: एलन में जो अकादमिक अनुशासन छात्र को दिया जाता है, वह उसे जीवन की किसी भी परीक्षा में शीर्ष पर पहुँचा सकता है। आज एलन केवल बेहतरीन डॉक्टर और इंजीनियर ही नहीं, बल्कि देश को दिशा देने वाले सर्वोच्च प्रशासक भी तैयार कर रहा है।

युवा पीढ़ी के लिए एक शाश्वत संदेश

अनुज अग्निहोत्री का एलन से लेकर AIIMS, और फिर AIIMS से UPSC AIR 1 तक का यह सफर अकल्पनीय, अद्भुत और अत्यंत प्रेरणादायक है। यह एक ऐसे युवा की गौरवगाथा है जिसने अपने सपनों की उड़ान को कभी कम नहीं होने दिया। छोटे शहर से आने वाले उन लाखों युवाओं के लिए अनुज एक प्रकाश स्तंभ बन गए हैं, जो बड़े सपने देखने का साहस तो करते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी या असफलता के डर से पीछे हट जाते हैं। अनुज की यह यात्रा चीख-चीख कर पुरजोर रूप से कहती है कि यदि आपके इरादे फौलादी हैं और आपको सही समय पर सही मार्गदर्शन  मिल जाए, तो रास्ते की हर बाधा आपके सामने घुटने टेक देगी।आज जब हम अनुज की इस बेमिसाल और ऐतिहासिक सफलता का जश्न मना रहे हैं, तो हमें उस मजबूत शैक्षणिक नींव और उन 'सकारात्मक संस्कारों' को भी नमन करना चाहिए जिसने इस गगनचुंबी इमारत का पूरा भार उठाया। सच ही कहा गया है, सकारात्मक संस्कार और उत्कृष्ट शिक्षा का जब मिलन होता है, तो सफलता अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचती है। डॉ.अनुज अग्निहोत्री को उनकी इस अद्वितीय, बहुआयामी और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पूरे देश की ओर से ढेरों बधाइयां और अनंत शुभकामनाएं! एक बार फिर यह सिद्ध हुआ... एलन है तो मुमकिन है!

रिपोर्टर - रमेश चन्द्र शर्मा 

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