डॉ नयन प्रकाश गांधी ,इंटरनेशनल एनएलपी लाइफ करियर कोच ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
झालावाड़ - राजस्थान में लाखों अभ्यर्थियों के लिए राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन (आरपीएससी) की सब-इंस्पेक्टर/प्लाटून कमांडर परीक्षा आगामी 5 एवं 6 अप्रैल को होने जा रही है । यह केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और स्थिर भविष्य की ओर बढ़ने का माध्यम है। अब जबकि परीक्षा में मात्र 48 घंटे शेष हैं, यह समय पारंपरिक पढ़ाई से अधिक “रणनीतिक तैयारी” का हो चुका है। यही वह क्षण है जहाँ तैयारी की दिशा ही परिणाम तय करती है।परीक्षा की संरचना स्पष्ट है जो तीन फेज में कैंडिडेट का अंतिम चयन करेगी जिसमें अभ्यर्थियों को सर्वप्रथम प्रथम फेज यानी लिखित परीक्षा के पड़ाव में आगामी पांच और छह अप्रैल को आयोजित परीक्षा में दो पेपर, जो प्रत्येक 200 अंकों का, 2-2 घंटे की अवधि और 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के साथ, तथा हर गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की कटौती के साथ दो शिफ्ट में देना होगा। प्रथम पेपर हिंदी भाषा का है, जो व्याकरणिक शुद्धता, अभिव्यक्ति और प्रशासनिक शब्दावली की समझ को परखता है। द्वितीय पेपर सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान का है, जिसमें राजस्थान का इतिहास ,भूगोल संस्कृति ,अर्थव्यवस्था, राजस्थान का राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र, ,चर्चित मुद्दे , भारत का इतिहास ,भूगोल ,संविधान ,राजनीतिक तंत्र ,अर्थव्यवस्था ,चर्चित मुद्दे और विश्व से जुड़े चर्चित मुद्दे जैसे विविध विषय शामिल हैं और साथ ही आधारभूत विज्ञान और तकनीक नवाचार ,लॉजिकल रीजनिंग ,मेंटल एबिलिटी जैसा स्कोरिंग सब्जेक्ट भी शामिल है । ऐसे में चयन केवल अभ्यर्थी की केवल जानकारी ,रटने की शैली पर नहीं, बल्कि टॉपिक वाइज आधारभूत सामान्य रूप से किए गए बारीकी से किया गया अध्ययन ,सटीकता और संतुलन पर निर्भर करेगा। इंटरनेशनल एनएलपी लाइफ करियर कोच डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि अंतिम 48 घंटे किसी नई सामग्री को जोड़ने के नहीं, बल्कि पहले से अर्जित ज्ञान को धार देने के होते हैं। इस संदर्भ में सबसे प्रभावी रणनीति यह है कि अभ्यर्थी हिंदी व्याकरण को अपना सबसे बड़ा स्कोरिंग क्षेत्र बनाएँ,उसमें शामिल हर एक घंटे में छोटे-छोटे स्लॉट में व्याकरण,संधि, समास, वाक्य शुद्धि, मुहावरे,प्रशासनिक एवं विधिक शब्दावली को एक बार रिविज़न कर समझ ले ,शब्द रचना एवं शब्द ज्ञान सेक्शन सबसे अधिक सरल परंतु इसमें रिवीजन लगातार आवश्यक होता है ,इसलिए एक एक मिनट का उपयोग करत हुए रिवीजन अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इसके बाद राजस्थान की अर्थव्यवस्था ,भूगोल ,संस्कृति और समेकित अध्ययन पर फोकस करना चाहिए जिसके विशेष रूप से राज्य सरकार के आर्थिक समीक्षा सॉफ्ट पीडीएफ जो आर्थिकी सांख्यिकी निदेशालय राज.सरकार द्वारा जारी कि जाती है उसमें से कम से कम लगभग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से बीस से पच्चीस प्रश्न आने की पूरी संभावना होती है, कई बार राजस्थान सरकार की महत्वपूर्ण प्रमुख योजनाएं ,उनके संबधित नोडल विभाग पर प्रश्न आते है ,विज्ञान और तकनीक में राजस्थान राज्य के विभिन्न विभागों के नवाचार ,केंद्रीय स्तर के चर्चित महत्वपूर्ण विज्ञान तकनीकी ,डिफेंस ,स्पेस एटॉमिक ,इकोलॉजी ,एनवायरनमेंट आदि पर नवाचार ,पर्यावरणीय चर्चित स्थल ,मुद्दे,हेरिटेज स्थल,पिछले एक दो वर्षों में चर्चित योजनाये, मंदिर ,महत्वपूर्ण व्यक्ति ,शासन प्रशासन में लाए गए बिल प्रस्ताव ,महत्वपूर्ण राजस्थान सरकार द्वारा फंडेड स्टार्टअप नाम उनके जनक ,कई चर्चित खबरे जैसे ईआरसीपी ,राइजिंग राजस्थान ,लखपति दीदी योजना ,फिट राजस्थान,ग्रीन बजट ,मिशन हरियालो राजस्थान , पेपर लीक और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स , मिलेट्स अभियान ,प्रधानमंत्री जन मन योजना ,राजस्थान उच्च न्यायालय के कई फैसले ,चर्चित बिल और अधिनियम विधानसभा और लोकसभा ,चर्चित व्यक्ति राजस्थान और भारत के संदर्भ में इन सभी को कई बार कंठस्थ रूप में दोहरा लेना “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। इसके लिए चाहे तो एक बार पिछले एक साल नहीं तो छ महीने की सुजस बुलेटिन, समाचार-पत्रों की प्रमुख खबरें तथा उनसे संबंधित आधिकारिक राजस्थान सरकार के यूट्यूब वीडियो को ध्यानपूर्वक सुनना और समझना अत्यंत उपयोगी हो सकता है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय करेंट अफेयर्स ,चर्चित व्यक्तियों की जानकारी के लिए योजना पत्रिका, विजन आईएएस, दृष्टि आईएएस की मासिक पत्रिकाएँ और प्रतियोगिता दर्पण विशेष रूप से विश्वसनीय मानी जाती हैं,जो कई प्लेटफॉर्म पर निःशुल्क मिल जाती है , यदि विद्यार्थी पिछले तीन महीनों की इन पत्रिकाओं के हाइलाइट मुद्दे, व्यक्तित्व, खेल उपलब्धियाँ आदि एक बार व्यवस्थित रूप से देख लें, तो सीधे प्रश्नों के उत्तर देने में बढ़त मिल सकती है और यदि कोई अभ्यर्थी पहले से नियमित समाचार-पत्र पढ़ता रहा है, तो इस समय केवल अपने बनाए हुए ब्रेकिंग नोट्स का बार-बार रिवीजन ही पर्याप्त होगा।किसी भी स्टेशनरी पर जाकर मॉक टेस्ट सैंपल पेपर बुकलेट लाए और हूबहू एक्जाम की परिस्थितियों के अनुरूप घर में बैठकर कम से कम एक चार घंटे का दोनों पेपर के लिए एक मौक टेस्ट पेपर जरूर दे उससे आपकी नियमितता ,एक्जाम हाल में होने वाली गलतियां दूर हो जाएगी और कम से कम दस ओ एम आर शीट की प्रिंट कॉपी पर गोले भरने की प्रैक्टिस करे,नहीं अटेम्प्ट करने पर पांचवां ऑप्शन भरने की भी प्रैक्टिस करे इससे समय प्रबंधन हो पाएगा अन्यथा समय असंतुलन से लगभग कई बच्चे जो सेल्फ स्टडी करते है या ऑनलाइन कोचिंग करने वाले बच्चे तैयारी अच्छी होने के बावजूद समय कमी के कारण पेपर छोड़ कर आ जाते है या उनमें से कई ओ एमआर शीट ही सही से नहीं भर पाते या उस दिन गलती कर देते है ,क्योंकि सेलेब्स बहुत डिटेल्ड है ,लगभग आरएएस के समकक्ष सेलेब्स है इसलिए छोटी छोटी गलतियां आपका सरकारी जॉब प्राप्त करने का एक स्वर्णिम अवसर खत्म कर सकती है ,इसलिए इन सभी निर्देशों को अपनाए आप एक्जाम में शत प्रतिशत सफल जरूर होंगे । समय प्रबंधन, प्रश्न चयन और त्रुटियों की पहचान ये सभी सेल्फ मॉक टेस्ट प्रैक्टिस से ही विकसित होते हैं। विशेष रूप से नकारात्मक अंकन को देखते हुए चयनात्मक प्रयास एवं इलिमिनेशन टेक्नीक की रणनीति भी अपनाना आवश्यक है, जहाँ गुणवत्ता, संख्या से अधिक महत्वपूर्ण होती है। इन सबसे महत्वपूर्ण अंतिम बात आप जितना मेंटल कंफर्ट रहेंगे आपकी मस्तिष्क की आपके द्वारा वर्ष भर से स्टडी किए गए विषयगत ज्ञान को खोलने और आपके दिल दिमाग में एक्यूरेसी के साथ आपको सटीक उतर देने की शक्ति उतनी प्रभावी होगी, यही है मेरिट /टॉप स्कोरिंग में आने वाले अभ्यर्थी का सफलता का मंत्र ,क्योंकि सारा खेल अंतिम दिनों में मेंटल मैनेजमेंट का है ,बस रिवाइज करे और कंफर्ट रहे ,तनाव आते ही हेल्थी फ्रूट खाए ,ज्यूस पिए ,लॉन्ग ब्रीदिंग एक्सरसाइज करे और फिर रिवाइज करे थोड़ी थोड़ी अंतराल में तनाव को हटाते रहे ,क्योंकि तनाव एक्जाम के समय आता ही आता है ,आवश्यक यह है कि उसे समय पर हल्का हल्का रेस्ट देकर कुछ अन्य हॉबीज फेवरेट सॉन्ग सुनकर ,टहल कर फिर अपने समय को तैयारी में लगाया जाए , लगातार एक जगह बैठे न रहे ,ब्रेन को ऊर्जा देना आपका काम है और आपका भटका ,घबराया मन उसे तनाव भी दे सकता है ,नकारात्मकता भी दे सकता है जो आपको इन अंतिम समय में समझना होगा ,बस यही खेल है अंतिम समय में पूरी तैयारी को मजबूती ,आत्मविश्वास और वैज्ञानिक तरीके से अंतिम रूप देने का और संपूर्ण मानसिक संतुलन इस पूरी प्रक्रिया का आधार है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि लिखित परीक्षा केवल पहला चरण है, और ध्यान रहे दोनों पेपर बराबर रूप से क्वालीफाइंग पेपर है इसलिए दोनों की तैयारी समान रूप से करना आवश्यक है , इसलिए इसे स्ट्रेटजी के साथ केवल द्वितीय फेज में पहुंचने का जरिया माने न कि टॉप रैंकर बनने का इसलिए स्ट्रेटजी ऐसी बनाए इन अंतिम समय में जो आपकी मजबूती वाले पार्ट हो, को नियमित रिवीजन करे,।अंततः, यह 48 घंटे केवल समय नहीं, बल्कि अवसर हैं,अपने पूरे प्रयास को एक दिशा देने का।जो अभ्यर्थी इस समय रणनीति, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा, वही अंतिम सूची में स्थान बनाएगा।अब परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि निर्णय, धैर्य और सटीकता की है,और यही अंतिम 48 घंटे इसे सिद्ध करेंगे कि आप आगामी द्वितीय फेज फिजिकल और तृतीय फेज अंतिम साक्षात्कार तक पहुंच पाते है या नहीं।
रिपोर्टर - रमेश चन्द्र शर्मा

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