विकसित कृषि-विकसित भारत @2047” विषय पर अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन 14-16 फरवरी, 2026
झाँसी : कुलपति डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा यह चतुर्थ 14 से 16 फरवरी 2026 के दौरान अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी-2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसके मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित जन प्रतिनिधि, जिला व मंडल प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। इस मेले का विषय “विकसित कृषि -विकसित भारत @ 2047” है। यह आयोजन किसानों की आय में वृद्धि, टिकाऊ खेती, पोषण सुरक्षा, कृषि नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिये आयोजित किया जा रहा है। इस मेला के आयोजन से बुंदेलखंड को आधुनिक, समावेशी और बाजारोन्मुख कृषि का केंद्र बनाने के में मदद मिलेगी। कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को परंपरागत कृषि, फल, सब्जी, फूल, मशरूम एवं अन्य लाभदायक फसलों के उत्पादन की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जायेगी। इसके साथ ही कृषि निर्यात की संभावनाएँ, दलहन, तिलहन एवं श्री अन्न (मिलेट्स) की खेती, इनके पोषक तत्व, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। यह प्रदर्शनी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पोषण-संवेदनशील कृषि और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को प्रोत्साहित करती है।
मेले का मुख्य आकर्षण सजीव कृषि तकनीकी प्रदर्शन, कृषि यंत्र प्रदर्शन, प्रक्षेत्र भ्रमण, पशु प्रदर्शनी, किसान वैज्ञानिक गोष्ठियाँ तथा तकनीकी सत्र हैं। तकनीकी सत्रों में श्री अन्न (मिलेट्स), प्राकृतिक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिकों और विषय-विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। सजीव प्रदर्शनों के अंतर्गत विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र में संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली (आई.एफ.एस), फसल कैफेटेरिया, मधुमक्खी पालन तथा आधुनिक कृषि यंत्रों के जीवंत मॉडल किसानों के लिए विशेष आकर्षण होंगे।
प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के 14 संस्थान, देश के लगभग 6 कृषि विश्वविद्यालय, 50 से अधिक निजी क्षेत्र की कंपनियाँ, एफ.पी.ओ. कृषि-आधारित स्टार्टअप्स, उद्यमी, एनजीओ तथा नाबार्ड सहित अन्य प्रमुख हितधारक भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, श्री अन्न (मिलेट्स) पर आधारित दो थीमेटिक पवेलियन तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के स्टॉल लगाए गए हैं, जो अनुसंधान, नवाचार और विस्तार गतिविधियों को प्रदर्शित कर रहे हैं।
इस किसान मेला में भारी संख्या में बुंदेलखंड के पद्म श्री सम्मानित किसान,किसान, प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह, कृषि उद्यमी, छात्र एवं युवा आमंत्रित हैं। मेले का उद्धेश्य परंपरागत कृषि ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ते हुए किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की संपूर्ण श्रृंखला से जोड़ना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
इस अवसर पर किसान मेला के उद्घाटन के साथ-साथ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय महत्व की दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं - जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद प्रयोगशाला एवं श्रीअन्न (मोटे अनाज) प्रयोगशाला का उद्घाटन भी होगा। ये प्रयोगशालाएँ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं नीति आयोग के सहयोग से स्थापित की गई हैं। इनके माध्यम से जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती तथा श्रीअन्न आधारित कृषि को वैज्ञानिक मजबूती मिलेगी और विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
इन प्रयोगशालाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बुंदेलखंड के किसानों को अब अपने क्षेत्र में ही श्रीअन्न और प्राकृतिक खेती के उत्पादों की वैज्ञानिक गुणवत्ता जाँच एवं प्रमाणन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसानों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। विश्वविद्यालय अब किसानों का वैज्ञानिक साथी बनकर उत्पादों की विश्वसनीयता, बेहतर मूल्य, बेहतर बाजार पहुँच और किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
साथ ही रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा उत्तर प्रदेश मिलेट पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य स्तरीय मिलेट कार्यशाला - “श्रीअन्न-श्रेष्ठ अन्न 2026” का भव्य आयोजन 14 से 16 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम पर्यावरण के लिए जीवनशैली की भावना और “विकसित कृषि-विकसित भारत @2047” के राष्ट्रीय विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत मिलेट प्रदर्शनी एवं मिलेट व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है, इसमें होटल व्यवसायियों, मिलेट उद्यमियों, गृहणियों, छात्रों एवं प्रगतिशील किसानों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिलगी। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रीअन्न आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद, जर्मप्लाज्म, पोस्टर, थीमैटिक पंडाल एवं पारंपरिक व नवाचारी मिलेट व्यंजन आकर्षण का केंद्र हैं।
कार्यक्रम के दौरान मिलेट प्रसंस्करण, मिलेट रेसिपी एवं मिलेट नवाचार के लिए आकर्षक पुरस्कार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना) भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को श्रीअन्न आधारित स्टार्टअप्स एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
मेले के अंतर्गत मंडलीय फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा रहा है, इसमें संबंधित प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। यह पहल किसानों, महिलाओं और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी तथा बागवानी क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगी।
इस दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा/मेला संयोजक डॉ. सुशील कुमार सिंह, निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी, निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार, अधिष्ठाता उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय डॉ. मनीष श्रीवास्तव, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. आरके सिंह, कुलसचिव डॉ एसएस कुशवाह, डॉ एमजे डोबरियाल,डॉ. गौरव शर्मा आदि उपस्थित रहे।


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