जिलाधिकारी की अध्यक्षता में धरती माता बचाव अभियान की जनपद स्तरीय समिति की बैठक हुई आयोजित
झांसी : भारत सरकार का 'धरती माता बचाओ' अभियान खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध व अत्यधिक प्रयोग किसानों में जागरूकता लाकर रोकेगा। इसी अभियान के तहत ''ग्राम स्तरीय धरती माता बचाओ निगरानी समिति'' उर्वरकों की बिक्री, कालाबाजारी, तस्करी और ओवररेटिंग पर गांव-गांव नजर रखकर लगाम लगाएगी। अभियान की शुरुआत एसे ग्रामाें से होगी, जहां सबसे अधिक रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किसान करते हैं। जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत निगरानी समिति की बैठक में अध्यक्षता करते हुए अभियान के उद्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से खराब हो रही मिट्टी की सेहत को सुधारना और जैविक प्राकृतिक खेती को अपनाना है। इसके साथ साथ ही मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए किसानों को हरी खाद के बीज वितरित करना, जिससे जमीन को जिंदा रखा जा सके।
जिलाधिकारी ने अभियान के उद्देश्य के विषय में बताया कि पराली प्रबंधन द्वारा फसल अवशेष को जलाने के बजाय, उसे जैविक खाद में बदलकर मिट्टी की संरचना में सुधार करना, जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और खेती को लाभकारी बनाने पर जोर है। उन्होंने अभियान के तहत समितियां ग्राम और जिला स्तर पर धरती माता बचाव निगरानी समितियों के गठन की जानकारी देते हुए मिट्टी के स्वास्थ्य की जानकारी और कृषि संबंधित योजनाओं को क्रियान्वित करेगी।जिलाधिकारी मृदुल चौधरी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट नवीन सभागार में बैठक आयोजित हुई, जिसमें जनपद स्तरीय, तहसीलों पर एसडीए और ग्राम पंचायतों पर प्रधान की अध्यक्षता में निगरानी कमेटी गठित की गई। ग्राम निगरानी समिति फसल से पहले बैठकें करके किसानों को संतुलित एवं वैकल्पिक उर्वरकों जैसे जैव व जैविक के प्रयोग की जानकारी देगी। रासायनिक उर्वरक की मात्रा व मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव बताएगी और परीक्षण के आधार पर मिट्टी काे उपचारित करके फसल कराएगी। इससे मृदा स्वास्थ्य में अनुकूल परिवर्तन आएगा। इसके अलावा उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग या सीमा पार तस्करी के लिए डायवर्जन के मामले में जिला व तहसील स्तरीय अधिकारियों को सूचना देगी। समिति एक तरह से निगरानी तंत्र की तरह उर्वरकों का अवैध डायवर्जन, मिलावटी, कालाबाजारी, ओवररेटिंग, भंडारण समेत हर गतिविधि पर नजर रखेगी। ऐसी स्थिति में जिलाधिकारी, एसडीएम और जिला कृषि अधिकारी स्तर से विक्रेता के पकड़ने जाने पर लाइसेंस निलंबन, निरस्त और एफआईआर तक कराई जाएगी। अन्य कोई भी लिप्त मिला तो उस पर भी एफआईआर कराई जाएगी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर कमेटी गठित कर दी है, जो सभी ग्राम पंचायतों पर नजर रखेंगी और ऐसी ग्राम पंचायतें, जहां अधिक रासायनिक उर्वरक का प्रयोग होता है, उन पंचायतों को चिह्नित करके वहाँ पर जागरुकता अभियान कार्यक्रम आयोजित किया जाए ताकि किसानों को रासायनिक उर्वरक का कम से कम उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि कम खपत वाले ग्राम पंचायतों को भी नजीर के रूप में जागरूकता कार्यक्रमों में प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वरुण कुमार पांडेय, डीडीओ सुनील कुमार, क्षेत्राधिकारी पुलिस रामवीर सिंह, डीडीएम नाबार्ड भूपेश पाल, उपनिदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, एलडीएम, डीएचओ सहित मत्स्य विभाग सिंचाई विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
रिपोर्टर : अंकित साहू


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