राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में व्हीलचेयर क्रिकेट का रोमांचक फाइनल, उत्तर प्रदेश बना विजेता
झाँसी : शुक्रवार को राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित चार राज्यों के दिव्यांग व्हीलचेयर क्रिकेट टूर्नामेंट के अंतर्गत दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच खेले गए फाइनल मुकाबले ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। खेल भावना, जज़्बे और उत्साह से ओत-प्रोत इस मुकाबले में उत्तर प्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।
फाइनल मैच में टॉस दिल्ली की टीम ने जीता और पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय लिया। निर्धारित 12 ओवरों में दिल्ली की टीम 68 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। दिल्ली की ओर से सौरभ मलिक ने सर्वाधिक 17 रनों की पारी खेली। उत्तर प्रदेश की सधी हुई गेंदबाज़ी के सामने दिल्ली के बल्लेबाज़ अधिक देर तक टिक नहीं सके।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी उत्तर प्रदेश की टीम ने मात्र 6 ओवर में 69 रन बनाकर जीत हासिल कर ली। टीम ने केवल 3 विकेट खोकर यह लक्ष्य प्राप्त किया और मैदान पर जीत का परचम लहरा दिया। उत्तर प्रदेश के बल्लेबाज़ों ने संयम और आक्रामकता का संतुलन बनाए रखते हुए शानदार खेल का प्रदर्शन किया। गेंदबाज़ी में भी टीम का दबदबा देखने को मिला।
दिल्ली की ओर से शेर सिंह ने 2 विकेट लिए, जबकि एक अन्य गेंदबाज़ को 1 विकेट प्राप्त हुआ। बावजूद इसके उत्तर प्रदेश की टीम के आत्मविश्वास और बेहतर रणनीति के आगे दिल्ली की टीम को हार का सामना करना पड़ा।
कार्यक्रम के अतिथि के रूप में सदर विधायक रवि शर्मा, संघर्ष सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. संदीप सरावगी, कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, (डायरेक्टर, कॉपरेटिव बैंक उत्तर प्रदेश, लखनऊ) आशीष उपाध्याय, रोहित पाण्डे, नीति शास्त्री उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समिति के संरक्षक अनूप चौबे, अध्यक्ष हरीश कुशवाहा, उपाध्यक्ष दिनेश यादव, कार्यवाहक अध्यक्ष हरविंद शिवहरे, सेक्टर अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा, कार्यकारिणी सदस्य अवधेश कुशवाहा एवं संगठन मंत्री सुरेश कुशवाहा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संघर्ष सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. संदीप सरावगी ने व्हीलचेयर क्रिकेट फाइनल के अवसर पर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी किसी भी मायने में कमज़ोर नहीं हैं, बल्कि वे अपने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा आज के इस रोमांचक मुकाबले ने साबित कर दिया कि प्रतिभा शारीरिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती। आवश्यकता केवल अवसर और प्रोत्साहन की होती है।
डॉ. सरावगी ने आगे कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और दिव्यांग खिलाड़ियों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि खेल के माध्यम से सामाजिक समरसता और आत्मबल को मजबूत किया जा सकता है। अंत में उन्होंने विजेता एवं उपविजेता दोनों टीमों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा आश्वासन दिया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
फाइनल मुकाबले के उपरांत विजेता टीम को ट्रॉफी और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। यह टूर्नामेंट दिव्यांग खिलाड़ियों के आत्मबल, संघर्ष और खेल भावना का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।
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