चैक बाउंस के मामले में दोषी को 65,200 रूपए अर्थदण्ड एवं 4 माह का कारावास
झांसी : चैक बाउंस के मामले में दोषी को पीठासीन अधिकारी, अतिरिक्त न्यायालय सूबा सिंह ने 65,200 रूपए अर्थदण्ड एवं 4 माह के साधारण कारावास के दण्ड से दण्डित किया है। एड कुमार वैभव तिवारी के अनुसार परिवादी केके पुरी कालोनी,आवास विकास निवासी मुकेश ढल पुत्र स्व० बी०के०ढल व अभियुक्त मनोज सेन एक ही मुहल्ले में रहने के कारण उनके अच्छे सम्बन्ध थे। परिवादी स्टील पाईप लगाने का काम करता है। अभियुक्त ने माह अप्रैल 2018 में अपने घर पर परिवादी से स्टील पाईप का काम करवाया, जिसमें मय माल व मजदूरी 40 हजार रुपए खर्च हुआ। परिवादी द्वारा अभियुक्त से 40,000 मांगने पर अभियुक्त ने कुछ समय बाद भुगतान करने को कहा।परिवादी को व्यवसाय में रूपयों की आवश्यकता पड़ने पर वह 02 मई 2018 को अभियुक्त के पास गया तो अभियुक्त ने भारतीय स्टेट बैंक शाखा रेलवे स्टेशन के अपने खाते की एक चैक 40 हजार रुपए की दी थी, जिसे परिवादी ने अपने खाते में भुगतान हेतु जमा की, तो बिना भुगतान के लौटा दी गयी। तब परिवादी ने 26 मई 2018 को अधिवक्ता कुमार वैभव तिवारी से डिमाण्ड नोटिस भिजवाया। अभियुक्त ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से गलत तथ्यों पर नोटिस का जबाव भिजवाया। इसके बाद परिवादी ने 27 जून 2018 को अभियुक्त के विरूद्ध धारा 138 एआईएक्ट का परिवाद दाखिल किया।
सात साल ,आठ महीने और बाइस दिन चले इस मुकदमे में न्यायालय ने अभियुक्त मनोज सेन को धारा 138 एन०आई० एक्ट के अपराध में दोषी पाते हुए चैक की धनराशि 40 हजार रुपए से इस धनराशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से लगभग 7 वर्ष तक परिवाद के चलने से 25,200 रूपए ब्याज निर्धारित कर कुल 65,200 रूपए अर्थदण्ड एवं 4 माह के साधारण कारावास के दण्ड से दण्डित किया।उपरोक्त अर्थदण्ड में से 60 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति परिवादी को तथा शेष धनराशि 5,200 रूपए राज्य सरकार के खाते में जमा की जायेगी।अभियुक्त मनोज सेन द्वारा अर्थदण्ड की धनराशि 65,200 रूपए अदा न करने की स्थिति में यह धनराशि अभियुक्त की सम्पत्ति से भू राजस्व के रूप में वसूल की जायेगी।

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