रिंग के किंग ओलंपियन सतीश कुमार ने कहा हेवीवेट में चैंपियन बनने का जज्बा रखे युवा बॉक्सर
झांसी : ओलमियन/अर्जुन अवॉर्डी बॉक्सिंग रिंग के बादशाह सतीश कुमार यादव ने नवोदित बॉक्सिंग बॉक्सरों को हेवीवेट बॉक्सिंग से बचाना नहीं बल्कि इस भार वर्ग में अपने आप को चैंपियन बनने का जज्बा लेकर रिंग में उतरना चाहिए। ये बात उन्होंने खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव से मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में स्पोर्ट्स हॉस्टल के चयन ट्रायल्स में बतौर चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभावान बॉक्सरों की कमी नहीं बस जरूरत है तो उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन में तराशने की।
सतीश यादव ने बताया कि गांव में बचपन से ही कबड्डी और कुश्ती,क्रिकेट को शरीर स्वस्थ रखने के लिए के खेलता था,बॉक्सिंग से मेरा दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं था।सेना में भर्ती होने के बाद रानीखेत में पहली पोस्टिंग के दौरान मेरी कद काठी को देख कर वहां के बॉक्सिंग कोच ने मुझे बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया।उसके बाद मेरी कड़ी मेहनत रंग लाई सर्विसेज टीम का प्रतिनिधित्व कर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीत कर गांव से ओलंपिक तक का सफर कर अपने परिवार और खुद का सपना पूरा किया।
बुलंदशहर शहर के साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सतीश यादव से जब ओलंपिक की उस यादगार बाउट के बारे में सवाल किया कि जख्मी होने के बाद डॉक्टरों ने आप को विश्व चैंपियन बाखोदिर जालोलोव के खिलाफ रिंग में उतरने से मना किया, आप के मन में डर नहीं था? तो उन्होंने तपाक से उत्तर में कहा कि तिरंगे की शान के आगे डर किस बात का था,जब समूचा भारत देश मुझ से ओलंपिक पदक की उम्मीद लिए बैठा था, तो मेरा बॉक्सिंग रिंग ने न उतरना उन्हें निराश करता रिंग पर खून बह रहा था,पर मेरा जूनून देश को मेडल दिलाने का था मैं आखिरी दम तक लड़ा,अफ़सोस कि मैं भारत को मेडल नहीं दिला सका। उन्होंने अपने बॉक्सिंग में उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए कहा कि पांच बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप पदक,एशियाई खेलों में पदक के जीत कर बॉक्सिंग में देश का मान बढ़ाया है। मुझे 2018 में भारत सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया।ये मेरे और मेरे परिवार के लिए गर्व की बात है।


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