महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में चिकित्सीय सुविधाओं एवं उपकरणों के अभाव के अभाव में जा रही हैं गरीब एवं मासूम बुन्देलखण्ड जनता की जान
झांसी : बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से इसलिए दिया गया क्योंकि प्रधानाचार्य लखनऊ चले गए है। लिखिए में दिनांक 2 और 4 तारीख को पत्र लिख कर समय मांगा पर नहीं दिया गए अब 10 अप्रैल को जबरन चैंबर में घुसकर मुलाकात की जाएगी। अति पिछड़ा व बदहाल बुंदेलखंड के लोगों के पास इलाज के लिए पैसा नहीं होता हैं इसलिए बुंदेली लोग सरकारी चिकित्सालयों पर निर्भर होकर अपनी बीमारी का इलाज करवाने को बाध्य रहते हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कुल चिकित्सकों के सृजित पद 175 हैं जिसमें से मात्र 62 ही नियमित बचे हैं और अन्य 65 चिकित्सकों को संविदा पर लेकर कार्य किया जा रहा है। नियमित 62 चिकित्सकों में भी कुल चिकित्सकों ने बीआरएस मांगा है और कुछ चिकित्सक रिटायरमेन्ट की कगार पर पड़े हैं। संविदा के 65 चिकित्सकों में से अधिकांश की सेवाओं का नवीनीकरण नहीं किया गया है जिससे चिकित्सा सुविधा चरमरा गयी है। वर्तमान में कार्यरत प्रधानाचार्य ने हाल ही में 75 संविदा चिकित्सकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं जिसमें आवेदन की अन्तिम तिथि समाप्त होने तक मात्र 4 चिकित्सकों ने इंटरव्यू देने का मन बनाया पर उसमें भी मात्र 2 चिकित्सको की भर्ती होना हैं।आवेदन किया है। कुल सृजित पद में भरे 62 नियमित एवं 65 संविदा पद पर ही कार्य हो रहा है शेष 51 पद लम्बे समय से रिक्त चले आ रहे हैं। अब सिर्फ 8,10 संविदा के पद से
क्लास-1 के पद भरते हुये आपसे यह भी निवेदन है कि क्लास-2,3,4 एवं आउटसोर्स से आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है या चिकित्सीय अभाव में प्राइवेट नर्सिंग होम में जाकर अपना इलाज कराना पड़ रहा है जिससे उनके गहने व घर तक बिक जाते हैं या लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाते है।
एक तरफ सरकार कहती हैं कि उत्तर प्रदेश में सब चंगा हैं और बुंदेलखंड में विकास की गंगा हैं। बुंदेलखंड का असली चेहरा सामने हैं, यहां चिकित्सा के लाले पड़ रहे हैं फिर भी सरकार हास्यास्पद बातें बोल रही है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मात्र एक एम.आर.आई, एक सी.टी, दो अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। मेडिकल कॉलेज में 20 करोड़ से ज्यादा के चिकित्सीय उपकरणों की आवश्यकता हैं परन्तु सरकार 3-4 करोड़ ही दे रही है। क्या इससे यहां अच्छी चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध हो सकती है। जिला अधिकारी झांसी ने धैर्यपूर्वक मामले को सुना और कहा कि प्रधानाचार्य ने अविवेकपूर्ण है जिसे ठीक करवाने की आवश्यकता। ऐसा निर्णय प्रधानाचार्य नहीं लेना चाहिए था। पत्र देने वालों में मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय, महामंत्री अशोक सक्सेना, प्रवक्ता रघुराज, रजनीश श्रीवास्तव, प्रदीप नाथ झा, शर्मा, हनीफ खान, उत्कर्ष साहू, नरेंद्र वर्मा, ब्रजेश राय, अभिषेक तिवारी आदि उपस्थित रहे।


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