झांसी की गद्दारी, गुलामी की कहानी
झांसी : यदि महारानी लक्ष्मीबाई के साथ गद्दारी नहीं की जाती तो हिन्दुस्तान इतने सालों तक अंग्रेजों की गुलामी में नहीं झेलता और इतिहास ही कुछ और होता। एक बार फिर जयचंद और दूल्हाजू जैसे गद्दारों की कुत्सित मानसिकता के चलते पार्क में सिंहासन पर विराजमान महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा की स्थापना नहीं हो सकी। प्रतिमा स्थापना के लिए दृढ़ संकल्पित कर्म योगी संस्था के पदाधिकारी महारानी की प्रतिमा को साथ लेकर सुबह से देर शाम तक पार्क में डटे रहे, लेकिन वजह बताने वाला कोई नहीं था कि आखिर किसके इशारे पर पार्क का द्वार नहीं खोला गया और झांसी की आन बान शान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाली वीरांगना की प्रतिमा लोडिंग वाहन में देर शाम तक अपनी ही नगरी में पार्क के अंदर प्रवेश की बाट जोहती रही लेकिन गद्दारों को शर्म भी नहीं आई। ऐसा नहीं संस्था द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। संस्था के पास जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों की आख्या के साथ ही शासन द्वारा नियमानुसार अनुमति भी प्रदान की गयी है। संस्था द्वारा शासन की अनुमति प्राप्त होते ही नियमानुसार जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर आयुक्त सहित संबंधित थाने, चौकी व अन्य विभागों को सूचित करने और सहमति होने पर ही संस्था के पदाधिकारी सोमवार को निर्धारित समय पर प्रातः 11 बजे रानी लक्ष्मीबाई पार्क पहुंचा, जहां थाना नवाबाद और दुर्ग चौकी पुलिस की मौजूदगी में जद्दोजहद के बाद भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका। संस्था के पदाधिकारियों की मानें तो एक पार्षद की अनुचित मांग पूरी नहीं होने के कारण वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की सिंहासन पर विराजमान प्रतिमा स्थापित करने में व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि इस तरह की सोच और कृत्य के लिए नगर निगम के ऐसे जनप्रतिनिधि को जनता कभी माफ कर सकेगी।
गौरतलब है कि दूल्हा जू 1857 की क्रांति के दौरान रानी लक्ष्मीबाई की सेना का एक सिपाही था, जिसने अंग्रेजों से मिलकर गद्दारी की थी। कटेरा का निवासी दूल्हा जू रानी का विश्वासपात्र था,लेकिन ओरछा गेट का रक्षक होने के बावजूद उसने धन के लालच में गेट खोल दिया, जिससे अंग्रेज़ झांसी के किले में घुस सके और रानी को रणक्षेत्र में उतरना पड़ा।
संस्था के अनुसार संपूर्ण विश्व में सिंहासन पर विराजमान महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा नहीं है और स्थापना के बाद पार्क की जो सुन्दरता निखर कर सामने आएगी वह अत्यंत ही दर्शनीय होगी।


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