नारी शक्ति वंदन अधिनियम, एक नए युग की दस्तक

झांसी :  आज सर्किट हाउस झांसी में  नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई जिसमें पत्रकारों से वार्ता करते हुए  झांसी की प्रसिद्ध समाजसेविका नीति शास्त्री ने बताया कि भारत के तोकतांत्रिक इतिहास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक युगांतरकारी कदम के रूप में सामने आया है। तोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का यह प्रावधान केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है. बल्कि नीति निर्माण को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इसका शीघ्र और प्रभावी किपान्वयन महिलाओं को "नीति की लाभार्थी से "नीति की निर्माता बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा और यही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शासन की प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। जब निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य पोषण, सुरक्षा जल और स्वच्छता जैसे विषय अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आते है। स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का अनुभव पहले ही यह दर्शा चुका है कि महिला प्रतिनिधित्व से नीतियां अधिक जन केंद्रित और प्रभावी बनती है। अब यही प्रभाव संसद और विधानसभाओं के स्तर पर दिखाई देगा जिससे विकास की दिशा अधिके संतुलित भऔर समावेशी होगी।

इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले एक दशक में तैयार की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण से देखा गया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लापा है और लड़कियों की माध्यमिक स्तर की नामांकन दर 80.2 प्रतिशत तक पहुंची है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए है, जो बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते है। उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धिं इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्राप्त हुई है। जिसके अंतर्गत 14 लाख से अधिक आगनवाडी केंद्रों के जरिए 8.97 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, जो महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।
आर्थिक सशक्तिकरण इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण आधार बना है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 32.29 करोड़ महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं, जिससे वित्तीय समावेशान को नई गति मिली है। मुद्रा योजना के 68 प्रतिशत ऋण मोहलीजी को प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। लखपति दीदी और नमी ड्रोन दीदी जैसी पहतों ने महिलाओं को पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ाकर तकनीकी और उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त किया है।
महिलाओं के जीवन में गरिमा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना को तहत महिलाओं को घरों का स्वामित्व मिला है, उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया है. स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन ने दैनिक जीवन की कठिनाइ‌यों को कम किया है। इन पहलों ने महिलाओं को समय, स्वास्थ्य और सम्मान तीनों गहरों पर सशक्त बनाया है।
इन सभी प्रयासों ने मिलकर एक ऐसा मजबूत आधार तैयार किया है, जिस पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक परिणामकारी सिद्ध होगा। जब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो वे इन योजनाओं को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ नई नीतियों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इससे शासन अधिक उत्तरदायी, पारदशों और संवेदनशील बनेगा।
यह अधिनियम केवल एक संवैधानिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को गति देने वाला एक निशांचक कदम है। जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ेगी, तो विकास की प्रक्रिया अधिक समावेशी, संतुलित और टिकाऊ बनेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि महिला नेतृत्व वाला विकास ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ते जा सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन उसी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र और विकास मॉडल को और सशक्त बनाएगा।माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं एनडीए सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 भारत के लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए. 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक संशोधन केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की करोडों माता बहनों और बेटियों के सम्मान का राष्ट्रीय संकल्प है।
नहिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण की दिशा अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेगी।

 अंत में उन्होंने कहा कि नारी शक्ति सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है।" नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एतिहासिक निर्णय है। यह कानून महिलाओं को "नागीदार" से "निर्णयकर्ता" बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
भारत में महिलाएँ वोटिंग और समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। भागीदारी बढ़ी है, लेकिन पर तेज बदलाव होंगे। यही मॉडल अब संसद और विधानसभाओं में लागू होगा।
विकसित भारत 2047 का सपना, महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है"
यह कानून सिर्फ आरक्षण नहीं, सिस्टम सुधार l यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र का प्रतीक है
"जब नारी सशक्त होती है, तो समाज सशक्त होता है, और जब समाज सशक्त होता है, तो राष्ट्र मजबूत होता है।
"नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है।"स्वच्छ भारत मिशन

गरिमा और स्वास्थ्य में सुधार। मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह -पर सुरक्षा। कार्यस्थल
मातृ मृत्यु दर में लगातार कमी।
राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भूमिका- आज
महिलाएँ वोटिंग में पुरुषों से आगे निकल रही हैं कई चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। पंचायतों में 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व (14.5 लाख महिलाएँ) कर रही।
लेकिन संसद / विधानसभा में यह अनुपात अभी भी कम है- यही अंतर यह कानून खत्म करेगा
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रमुख लाभ-
लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण। नीति निर्माण अधिक संवेदनशील और जन-केंद्रित होगा। महिलाओं को "लाभार्थी" से "नीति निर्माता" बनाया जाएगा।
पंचायती राज का अनुभव क्या बताता है-
महिला नेतृत्व में पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा पर ज्यादा होगा। जवाबदेही मजबूत होगी। जमीनी स्तर काम
प्रतिनिधित्व अभी भी संतुलित नहीं है। इस अंतर को खत्म करने के लिए यह कानून आवश्यक है।
महिलाओं के नेतृत्व का प्रभाव (वैश्विक व भारतीय संदर्भ) जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है नीतियाँ अधिक समावेशी और संवेदनशील बनती हैं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण पर अधिक ध्यान जाता है शोध बताते हैं कि जेंडर गैप कम होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर तक की वृद्धि संभव है।
पिछले 10 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के ठोस परिणाम- 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुले। मुद्रा योजना लगभग 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ। 10 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। PMAY में बड़ी संख्या में घर महिलाओं के नाम। STEM में 43 प्रतिशत महिला भागीदारी।
सरकारी योजनाओं का सीधा प्रभाव-
उज्ज्वला योजना 10 करोड़ गैस कनेक्शन।
जल जीवन मिशन योजना से -14 करोड़ से अधिक घरों में पानी।
इस अवसर पर सुमन पुरोहित, प्रियंका साहू,राशि साहू, उपस्थित रहीं।

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