समस्या के समाधान तक लड़ी जायेगी स्मार्ट मीटर की लडाई प्रदीप जैन आदित्य

झांसी :  इन दिनों झांसी व ललितपुर (बुंदेलखण्ड) में विधुत विभाग द्वारा लगाए गये स्मार्ट प्रीपेड़ मीटर से परेशान उपभोक्ता की समस्या को लेकर एक स्थानीय होटल में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने  झांसी व ललितपुर के कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुये सभी राजनैतिक दलो व सामाजिक संगठनों से इस मुहिम में सहयोग करने का आव्हान किया। उन्होनें बताया कि 20 अप्रैल को  मंडलायुक्त महोदय को ज्ञापन दोय जायेगा। पूर्व मन्त्री ने कहा कि  बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के बाबजूद अभी भी जबरन उपभोक्ता की बिना स्वीकृति के मीटर लगाए जा रहे है। जबकि प्रीपेड अनिवार्य नहीं है।1 अप्रैल 2026 के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नए नियमों के अनुसार अब प्रीपेड मोड अनिवार्य नहीं रह गया है। आपके पास पोस्टपेड (महीने के अंत में बिल भरना) चुनने का कानूनी अधिकार है।ठेकेदारों ने झूठ बोलकर मीटर लगाए हैं कि यह अनिवार्य है। बिना सही जानकारी दिए मीटर लगाना 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019' के तहत सेवा में कमी  माना जाता है। इलाहाबाद हाई कोर्ट (अप्रैल 2026) के अनुसार, बिजली अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। बिना किसी मानवीय सुनवाई के, केवल ऐप के माध्यम से बिजली काट देना गैर-कानूनी है। स्मार्ट मीटर डिजिटल होते हैं और बिजली आने पर AC या मोटर के शुरू होते समय लगने वाले भारी 'झटके' (Surge) को भी रिकॉर्ड कर लेते हैं। झाँसी में बार-बार बिजली कटने के कारण, आपका मीटर हर बार उस 'झटके' को यूनिट में जोड़ देता है, जिससे बिल बढ़ जाता है।ये मीटर आपकी बिजली के 'सिग्नेचर' से पहचान सकते हैं कि आप कब AC चला रहे हैं और कब गीजर। यह एक प्रकार से आपके निजी जीवन की जासूसी है, जिसका डेटा निजी कंपनियों (जैसे Jio) के पास जा रहा है।अप्रैल 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार, लाखों उपभोक्ता ऐप खराब होने के कारण अपना बिल या बैलेंस नहीं देख पा रहे हैं। एक फेल सिस्टम को जनता पर थोपना गलत है। सरकार कहती है कि मीटर 'फ्री' है, लेकिन असल में Jio सिम और डेटा का खर्च आपके 'फिक्स्ड चार्ज' (Fixed Charges) के जरिए आपसे ही वसूला जा रहा है। स्मार्ट मीटर की कैलकुलेशन कैसे हो रही है, इसका कोई हिसाब जनता को नहीं दिया जाता। पुराने मीटर की तरह इसे खुद चेक करना मुश्किल है।सरकार का कहना है कि बिल 5 गुना बढ़ने पर ही वे जाँच करेंगे। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बिल का 20% या 50% बढ़ना भी बहुत बड़ी समस्या है।

 जबकि  विधुत अधिनियम 2003 की धारा 56 कहती है कि अगर उपभोक्ता बिल का भुगतान नहीं करता, तो बिजली विभाग को 15 दिन का नोटिस देगा होगा। उसके बाद ही कनेक्शन काट सकता है।बिना नोटिस बिजली काटना वैध नही है।जबकि कंपनियों कहती है कि प्रीपेड मीटर मोबाइल रिचार्ज जैसा है।बैलेंस खत्म सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है। इसलिए सेक्शन 56 का नोटिस लागू नहीं होता है।लेकिन उपभोक्ता का मजबूत कानूनी तर्क है कि बिजली मूलभूत सेवा है। उपभोक्ता की अचानक सप्लाई काटना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ हो सकता है। इसके लिये संदेश देना /पूर्व सूचना देना  जरुरी है।बिजली जीवन की आवश्यक सेवा है।इसे मोबाइल रिचार्ज जैसा नहीं माना जा सकता।
         इसके अलावा कुछ और बिन्दुओं  पर भी ध्यान दिलाते हुये कहा कि नये कनेक्शन पर मीटर लगाने हेतु लम्बी पेंडिग लिस्ट चल रही है । वही पैसे लेकर मीटर लगाए जा रहे है।
जीनस  कम्पनी द्वारा मीटर लगाने पर जो तार मिलता है। उसको पूरा नही लगाया जाता है। वह बाद में बेच दिया जाता है।मीटर में रीडिंग का ब्योरा उपलब्ध नही होता है। उपभोक्ता को मीटर की रीडिंग की एम आर आई नही दी जा रही है।पूर्व में मीटर में ही बिल का केलक्यूलेशन होता था मगर अब सर्वर द्वारा की जा रही है । उपभोक्ता का बिल डाउनलोड नही हो रहा है।पहले पोस्ट पैड करके मीटर लगाया जाता है। 15 दिन बाद कम्पनी उसे प्री पैड कर देती है। सीलिंग सर्टीफिकेट पर पोस्ट पैड/ प्री पैड नही लिखा जाता है।जो कि महत्वपूर्ण है। हजारो मीटर बदले गये है परंतु उपभोक्ताओं को जांच रिपोर्ट 5 एम नही दी जा रही है।
      पत्रकार वार्ता में  जिलाध्यक्ष देशराज रिछारिया, शहर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, राहुल रिछारिया, मुकेश अग्रवाल, राजेन्द्र सिंह यादव, इदरीश खान ,मनीराम कुशवाहा, योगेन्द्र सिंह पारीछा, गौरव जैन, जसपाल सिंह बन्टी, रामनरेश यादव, मोहन चंदेल, मोन्टी शुक्ला, अंकित यादव , अरविन्द बब्लू, शंभू सेन, अनिल रिछारिया, अमीर चंद आर्य, मजहर अली आदि मौजूद रहें।

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