कारखाना में वर्ल्ड हेरिटेज डे पर हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया

झाँसी : भारतीय रेल के लिए सर्वाधिक वैगन का उत्पादन करने वाले वैगन वर्कशॉप, झाँसी ने वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। जिसमें झाँसी के नागरिकों और स्कूल के बच्चों ने वैगन वर्कशॉप में स्थापित झलकारी बाई हरित पार्क और कारखाना म्यूजियम का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने सन् 1874 के स्टीम रोड रोलर, 1897 के बर्मा टीक से बने ओल्ड सैलून, सिन्धिया स्टेट रेलवे के पुराने कोचेज व वैगन, धौलपुर दरबार रेलवे के पुराने कोचेज के साथ कारखाना म्यूजियम में रखी हुई पुरानी रेल सामग्रियों को देखा।

इसमें मुख्य रूप से "एक कदम मानवता की ओर" एनजीओ द्वारा संचालित लिटिल लाइफ पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राएं बहुत उत्साहित नजर आए। 
इस अवसर पर "धरोहर को संरक्षित रखकर भविष्य का निर्माण" विषय पर मुख्य कारखाना प्रबन्धक, झाँसी के मुख्य आतिथ्य में एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
 अजय श्रीवास्तवा ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और विविधता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है, जिसमें भारतीय रेलवे का योगदान भी महत्वपूर्ण है। यू.एन.ई.एस.सी.ओ. (UNESCO) द्वारा दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका शिमला रेलवे और मुम्बई सीएसटीएम स्टेशन बिल्डिंग को विश्व धरोहर घोषित किया गया है। इसके साथ ही वैगन वर्कशॉप झाँसी भी हमारी विरासत की कहानी कहता है क्योंकि इसे भी 130 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि विरासत का मतलब सिर्फ बिल्डिंग या सामग्रियां ही नहीं होतीं, बल्कि हमारे पूर्वज, हमारे बुजुर्ग, हमारी सांसें और संस्कृति को सहेजना और उनकी सुरक्षा करना ही हमें वर्ल्ड हेरिटेज-डे से सीखना चाहिए।
संरक्षा अधिकारी आफाक अहमद ने झाँसी रेलवे के विस्तार, प्राचीन इतिहास और इसके विकास क्रम को अपने शब्दों में बखूबी प्रस्तुत किया।
सेमिनार में डिप्टी सी.एम.ई. अमित तिवारी, डिप्टी सी एम् ई शिवेंद्र, डिप्टी सी.ई.  बी. के. वर्मा, उत्पादन इंजीनियर समर्थ अग्रवाल,डब्ल्यू.एम. संजीव चाबा,ए.डब्ल्यू.एम. अयूष गोयल, सुरेश कुरील,पी.एस. टू सी.डब्ल्यू.एम. मधुसूदन सिन्हा,कार्यालय अधीक्षक (सामान्य) शिवशंकर सिंह,मीडिया निदेशक दीपक भिण्डोरिया सेमिनार का संचालन सीनियर सेक्शन इंजीनियर ए.के. जैन ने किया और आभार प्रदर्शन उत्पादन इंजीनियर समर्थ अग्रवाल ने व्यक्त किया।

 

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