नई पीढ़ी बनी संस्कृति की वाहक, “बाल वेद वाणी कार्यक्रम” ने जीता दिल
झांसी - परंपरागत रूप से मनाई जाने वाली परशुराम जयंती को इस बार ब्राह्मण समाज,झांसी ने एक नए और प्रेरणादायक स्वरूप में प्रस्तुत किया, जहां केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहकर नई पीढ़ी को मंच पर लाकर संस्कृति, संस्कार और संस्कृत का सजीव संगम प्रस्तुत किया गया। भगवान परशुराम जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन-अर्चन के साथ आयोजित “बाल वेद वाणी एवं संस्कृत गौरव एवं ब्राह्मण शिरोमणि अलंकरण कार्यक्रम” अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अभिनव आयोजन में बालक-बालिकाओं ने जिस आत्मविश्वास, शुद्ध उच्चारण और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के साथ वेद मंत्र, श्लोक, स्तोत्र एवं संस्कृत वाचन प्रस्तुत किया, उसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की स्वर लहरियों में न केवल वेदों की गूंज थी, बल्कि उसमें भारतीय संस्कृति और संस्कारों की जीवंत झलक भी दिखाई दी। कई प्रस्तुतियां इतनी प्रभावशाली रहीं कि पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि यदि उचित मंच और मार्गदर्शन मिले, तो नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात करने में पूरी तरह सक्षम है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जितेन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि यह आयोजन पारंपरिक कार्यक्रमों से अलग हटकर एक सार्थक पहल के रूप में किया गया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं संस्कृत भाषा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जहां युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, वहीं इस प्रकार के आयोजन उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम में बालक-बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत वेद मंत्र, स्तोत्र, श्लोक एवं संस्कृत वाचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित जनसमूह ने बच्चों की प्रतिभा, उच्चारण शुद्धता एवं आत्मविश्वास की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर महानगर धर्माचार्य आचार्य पं. हरिओम पाठक, बुंदेलखंड ब्राह्मण विद्वत परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष आचार्य बृजकिशोर हरभजन भार्गव एवं मुरली मनोहर मंदिर के आचार्य वसंत विष्णु गौलवलकर ने अपने संबोधन में कहा कि “वेदों की ध्वनि, संस्कारों की ज्योति” “ज्ञान, परंपरा और संस्कार का संगम” कार्यक्रम के प्रत्येक चरण में सजीव रूप में अनुभव किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन सांस्कृतिक एकता एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम के अंत में सहसंयोजक देवेंद्र दुबे और मुकेश मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। संचालन डा जितेन्द्र कुमार तिवारी ने किया। प्रतिभागी छात्र-छात्राएं (संस्कृत वाचन एवं मंत्रोच्चारण): श्रेष्ठ भार्गव, मान्यता शर्मा, अनन्या मिश्रा, गौरांगी रिछारिया, मान्या रिछारिया, अथर्व चतुर्वेदी, अथर्व बबेले, यश दुबे, वेदिका तिवारी, आरुष शर्मा, शिवांश शुक्ला,अनिका तिवारी,आरोही तिवारी को आकर्षक उपहार देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित विप्र बंधु: आशुतोष द्विवेदी, अभिषेक भार्गव, पंकज भार्गव, दुष्यंत चतुर्वेदी, देवेंद्र दुबे, अखिलेश तिवारी कम्मू महाराज, संजय दुबे, मोतीलाल दुबे, विधा प्रकाश दुबे, अमित चिरवारिया, सचेत शुक्ला, नीरज स्वामी, गोकुल दुबे, बी.पी. नायक, एम.पी. द्विवेदी, विवेक दत्त स्वामी, अमर सिद्ध, अरविंद दुबे, सुमित उपाध्याय, डॉ. संजय त्रिपाठी, पंकज शुक्ला, आर.एन. उपाध्याय, आर.एन. शर्मा, अजय तिवारी, डॉ. मनीष मिश्रा, एड. शिरोमणि शर्मा, राजेश त्रिपाठी, एच.एन. शर्मा, मैथिलीशरण मुदगिल, दुर्गेश दुबे, मुकेश मिश्रा, डॉ. दिलीप शर्मा, आचार्य राजीव पाठक, अभिषेक सोनकिया, महेश चंद्र गौतम, आर.के. सहारिया, डॉ. विवेक मिश्रा, इंजी नवीन शुक्ला, मनीष दीक्षित, सियाराम शरण चतुर्वेदी, हरी ओम मिश्रा सभासद, संजीव तिवारी अरुण पटैरिया, इंजीनियर वेद भार्गव ,सपना शुक्ला,निधि भार्गव,सतेंद्र कुमार तिवारी आदि को सम्मानित किया गया।


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