BIET झाँसी और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के बीच ऐतिहासिक समझौता: ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मिलेगा बढ़ावा
झाँसी : आज बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (BIET), झाँसी में आज उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के साथ ‘थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन मैकेनिज्म’ हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए I
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. जितेंद्र कुमार शर्मा तथा UPPCB झाँसी के क्षेत्रीय अधिकारी श्री इमरान अली ने इस आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर कर इसे औपचारिक रूप प्रदान किया I समारोह में संस्थान के सम्मानित संकाय सदस्यगण, सम्मानित कर्मचारीगण तथा सिविल इंजीनियरिंग एवं केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे I इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को सरल और प्रभावी बनाना है I इस समझौते के अंतर्गत:
• निरीक्षण-मुक्त प्रक्रिया: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित ‘ऑरेंज’ एवं ‘ग्रीन’ श्रेणी के उद्योगों/ परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी I
• थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन: अब इन उद्योगों को CTE (सहमति स्थापना), CTO (सहमति संचालन) तथा CCA (समेकित सहमति एवं प्राधिकरण) हेतु बोर्ड अधिकारियों द्वारा भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी I
• BIET की भूमिका: संस्थान एक सूचीबद्ध थर्ड पार्टी संस्था (TPI) के रूप में कार्य करेगा I BIET द्वारा प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट के आधार पर ही UPPCB द्वारा आवेदनों का निस्तारण किया जाएगा I
• प्रमाणन एवं मूल्यांकन: संस्थान उद्योगों का भौतिक निरीक्षण कर ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ ढांचे के अंतर्गत CTE (नवीन/ नवीनीकरण), CTO तथा खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Waste) नियम, 2016 के तहत प्रमाणन एवं मूल्यांकन का कार्य करेगा I
संस्थान के निदेशक प्रो. जितेंद्र कुमार शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि पारदर्शिता एवं तकनीकी सटीकता को भी सुनिश्चित करेगा I
प्रो. शर्मा ने यह भी बताया कि यह समझौता छात्रों के लिए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है I उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु निरंतर परामर्श सेवाएं प्रदान की जा रही हैं तथा भविष्य में भी संस्थान के विभिन्न विभागों के माध्यम से क्षेत्रीय समस्याओं के प्रभावी समाधान हेतु सेवाएं उपलब्ध कराई जाती रहेंगी I


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