लू (हीट स्ट्रोक) गर्म हवाओं से बचाव हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जनहित में जारी

झांसी - अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) वरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि जनपद में विगत दिनों से औसत तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है जो कि अत्यधिक गर्मी को प्रदर्शित करता है और आने वाले दिनों में तापमान 47 डि०से० से अधिक होने का अनुमान है। उक्त के दृष्टिगत आवश्यक सावधानिया रखी जानी चाहिए। लू (हीट स्ट्रोक) गर्म हवाओं से बचाव हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जनहित में जारी किये गये है।

कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य बाढी फल्यूड सूखने लगती है। शरीर से पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, पार्किनसन रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह, ऐसी कुछ औषधियां जैसे डाययूरेटिक एटीस्टिामिनिक मानसिक रोग की कुछ औषधियां का उपयोग करने पर लू लगने की सम्भावना अधिक रहती है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक में गर्म लार, शुष्क त्वचा, पसीना, तेज पल्स, उथले श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, थकान व कमजोरी, चक्कर आना, मूत्र न होना आदि लक्षण होते हैं। उपरोक्त लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर में उक्त तापमान से शरीर के आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है, तभी शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न करता है। मनुष्य के हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता है। जो लोग एक या दो घंटे से अधिक समय तक 40.6 डिग्री० से० (105 डिग्री० एफ०) या अधिक तापमान अथवा गर्म हवा में रहते है, तो उनके मस्तिष्क में क्षति होने की सम्भावना प्रबल हो जाती है।
        

हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय क्या करे-क्या न करें

उन्होंने बताया कि हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने हेतु प्रचार माध्यमों पर हीट वेव की चेतावनी पर ध्यान दें। अधिक से अधिक पानी पियें, हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें। धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। अगर आप खुले में कार्य करते हैं तो सिर चेहरा, हाथ पैरों को कपड़े से ढके तथा छाते का प्रयोग करें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछे अथया नहलाये तथा चिकित्सक से सम्पर्क करें। यात्रा करते समय पीने का पानी साथ ले जाएं। ओ०आर०एस०, घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माठ), नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करे जिससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके।
हीट स्ट्रोक हीट रेस हीट के लक्षणों पौसे कमजोरी, चक्कर आना, सरदर्द उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचाने, यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते हैं तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह ले। अपने घर को ठण्डा रखें, पर्दे, दरवाजे आदि का उपयोग करें तथा शाम/रात के समय घर तथा कमरो को ठण्डा करने हेतु इसे खोल दें, पखे, गीले कपड़ों का उपयोग करें तथा बार-बार स्नान करे, कार्य स्थल पर ठण्डे पीने का पानी रखे/उपलब्ध कराये, कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें। श्रमसाध्य कार्यों को ठण्डे समय में करने/कराने का प्रयास करें। घर से बाहर होने की स्थिति में आराम करने की समयावधि तथा आवृत्ति को बढ़ायें। गर्भस्थ महिला कर्मियों तथा रोगग्रस्त कर्मियों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।

क्या न करे

एडीएम वित्त एवं राजस्व ने यह भी बताया कि जानवरों एवं बच्चो को कभी भी बन्द खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोड़े। दोपहर 12 से 03 बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिये जहां तक सम्भव हो घर के निचली मंजिल पर रहे, गहरे रंग की भारी तथा तंग कपडे न पहनें, जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें, अधिक प्रोटीन तथा बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें तथा अल्कोहल चाय व काफी पीने से परहेज करें।

 

रिपोर्ट अंकित साहू

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.