खेत में अकेली युवती के साथ दुष्कर्म के आरोपी शिक्षा मित्र को‌ नहीं मिली जेल से रिहाई,जमानत अर्जी निरस्त

झांसी - खेत में अकेली युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी शिक्षा मित्र को‌ जेल से रिहाई नहीं मिल सकी,उसकी जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलेश कच्छल के न्यायालय ने निरस्त कर दी।

जानकारी देते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता मृदुल कांत श्रीवास्तव ने बताया कि वादिनी मुकदमा ने 04 फरवरी 2026 को थाना समथर में तहरीर देते हुए बताया था कि 01 फरवरी 2026 को शाम वह अपने खेत में बरसीन काटने गई थी। बरसीन काट कर उसने गठरिया बांध ली।खेत के बगल के रामू पुत्र बलवान सिंह गुर्जर ने चारे की गठरिया उठा कर उसके सिर पर रखवा कर हाथ पकड़ लिया और अश्लील हरकतें की । वह अपना हाथ छुड़ा कर मौके से भाग कर घर पहुंची।  उसका भाई छोटा है व पिता की मृत्यु एक माह पूर्व हो चुकी है। वह वृद्ध दादा-दादी के साथ अकेली रहती है, इसलिए डर के कारण उसने उस दिन घरवालों को उक्त बात नहीं बताई। तहरीर के आधार पर थाना समथर में धारा- 74 भारतीय न्याय संहिता के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया एवं दौरान विवेचना धारा-64 (1) भारतीय न्याय संहिता की बढ़ोत्तरी कर विवेचना उपरान्त आरोप पत्र  धारा- 74,64 (1) भारतीय न्याय संहिता के अन्तर्गत  न्यायालय में पेश किया गया। उक्त मामले में जेल में बंद अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र में बताया कि अभियुक्त ने कोई अपराध नहीं किया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट में बलात्कार करने संबंधी तथ्य अंकित नहीं है। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्त के विरूद्ध धारा-64 (1) भारतीय न्याय संहिता का अपराध नहीं बनता है। 

वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता (दाण्डिक) ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अभियुक्त के विरूद्ध वादिनी मुकदमा की लज्जा भंग करने के आशय से आपराधिक बल का प्रयोग कर हाथ पकड़ कर छेड़छाड़ करने एवं बलात्संग करने का अभियोग है।अभियुक्त को जमानत पर रिहा किये जाने पर पीड़िता व गवाहान को डरा-धमका कर साक्ष्य को प्रभावित करने की संभावना है, उक्त आधार पर जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त किये जाने की याचना की गई। वादिनी मुकदमा / पीड़िता ने भी अपने बयान अन्तर्गत धारा-183 बीएनएसएस में अभियुक्त द्वारा बरसीन की गठरी उठाने के बहाने पीछे से पकड़ कर छेड़खानी करने व बलात्कार करने  का स्पष्ट कथन किया है।अभियुक्त को जमानत पर रिहा किये जाने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित आधार नहीं पाते हुए न्यायालय ने अभियुक्त रामू उर्फ गौरव सिंह पुत्र बलवान सिंह की ओर से प्रस्तुत  जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया।

 

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